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मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप 2025 के अंत तक बाजार में, 6G पर भी तेजी से काम: पीएम मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को घोषणा की कि भारत में निर्मित पहला ‘मेड इन इंडिया’ सेमीकंडक्टर चिप 2025 के अंत तक बाजार में उपलब्ध होगा। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि सरकार 6G तकनीक के विकास पर मिशन मोड में काम कर रही है। यह बयान पीएम मोदी ने द इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में अपने संबोधन के दौरान दिया।

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प्रधानमंत्री ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि सेमीकंडक्टर निर्माण भारत में 50-60 साल पहले शुरू हो सकता था, लेकिन उस समय हम यह अवसर चूक गए। अब हमने स्थिति को बदल दिया है। सेमीकंडक्टर से संबंधित कारखाने भारत में स्थापित हो रहे हैं, और इस साल के अंत तक पहला ‘मेड इन इंडिया’ चिप बाजार में आएगा।” उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि भारत 6G तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है, जो देश को वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी बनाने में मदद करेगा।

भारत सरकार ने 2021 में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) शुरू किया था, जिसका उद्देश्य चिप डिजाइन, निर्माण और परीक्षण में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4,594 करोड़ रुपये की लागत से चार नई सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें दो प्रोजेक्ट ओडिशा, एक पंजाब और एक आंध्र प्रदेश में स्थापित किए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नोएडा और बेंगलुरु में अत्याधुनिक चिप डिजाइन सुविधाएं शुरू की गई हैं, जहां 3 नैनोमीटर आर्किटेक्चर वाले चिप्स डिजाइन किए जाएंगे। यह भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर नवाचार में अग्रणी देशों की सूची में शामिल करेगा।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में 6G तकनीक के विकास पर जोर देते हुए कहा कि भारत अगली पीढ़ी की संचार तकनीक में पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने कहा, “हम ‘मेड इन इंडिया’ 6G पर तेजी से काम कर रहे हैं, जो वैश्विक प्रगति के साथ तालमेल बिठाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।”

स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन भारत की तकनीकी और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के लिए चिप्स का आयात करता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का जोखिम रहता है। स्वदेशी चिप्स के उत्पादन से न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि रक्षा, अंतरिक्ष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे क्षेत्रों में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

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