महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल: सत्ता की खातिर BJP ने थामा कांग्रेस और AIMIM का हाथ, हाईकमान नाराज
मुंबई : महाराष्ट्र की सियासत में उस समय हड़कंप मच गया जब स्थानीय निकाय चुनावों के बाद भाजपा के स्थानीय नेताओं ने अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वियों – कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM – से हाथ मिलाकर सत्ता हासिल कर ली। ठाणे जिले के अंबरनाथ नगर परिषद में भाजपा ने कांग्रेस के साथ और अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में AIMIM के साथ पोस्ट-पोल गठबंधन किया, जिससे राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हलचल मच गई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अंबरनाथ में भाजपा ने कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ बनाई, जबकि अकोट में AIMIM सहित अन्य दलों के साथ ‘अकोट विकास मंच’ गठित किया गया। इन गठबंधनों से भाजपा को दोनों जगहों पर बहुमत मिल गया और शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया गया।
हालांकि, यह गठबंधन ज्यादा देर नहीं टिका। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन समझौतों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे ‘अनुशासनहीनता’ करार दिया और तुरंत तोड़ने के आदेश दिए। फडणवीस ने स्पष्ट कहा, “कांग्रेस या AIMIM के साथ कोई गठबंधन स्वीकार्य नहीं है। अगर स्थानीय नेताओं ने ऐसा किया है तो इसे तुरंत खत्म किया जाए और कार्रवाई होगी।”
भाजपा की ओर से अकोट में गठबंधन के लिए जिम्मेदार विधायक प्रकाश भारसकले को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया। वहीं, कांग्रेस ने भी अंबरनाथ के अपने सभी पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को सस्पेंड कर दिया।
विपक्षी दलों ने इस पर तीखा हमला बोला। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने भाजपा को ‘दो मुंहे केंचुए’ करार देते हुए कहा, “कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा देने वाली पार्टी अब खुद कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी से गुपचुप गठबंधन कर रही है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर सत्ता की लालच में किए गए ये जुगाड़ राज्य की महायुति सरकार (BJP-शिवसेना-एनसीपी) की एकजुटता पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले BMC चुनावों से पहले यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति में नई उथल-पुथल का संकेत दे रही है।
यह मामला भाजपा के ‘पार्टी विद अ डिफरेंस’ के दावे पर भी सवाल खड़े कर रहा है। देखना यह है कि हाईकमान की सख्ती से ये गठबंधन पूरी तरह खत्म होते हैं या स्थानीय स्तर पर ऐसी राजनीति जारी रहती है।

















