माँ की थमती साँसों को मंत्री इरफान अंसारी ने दी ज़िंदगी, गाँववालों ने कहा—”मसीहा
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माँ की थमती साँसों को मंत्री जी ने दी ज़िंदगी, गाँववालों ने कहा—”मसीहा जब नब्ज थम गई, तब मंत्री जी ने बढ़ाया हाथ—माँ की साँसों की लौ फिर जल उठी नेता नहीं, फरिश्ता निकले मंत्री जी—माँ की धड़कनें थमने से पहले ही बन गए देवदूत
नारायणपुर के पाबिया केंदुआटांड गाँव में जो घटना घटी, उसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। गुरुवार को गोविंदपुर-साहिबगंज हाईवे पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 11 वर्षीय विशाल मुर्मू की असमय मृत्यु हो गई। इस त्रासदी ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया। माता-पिता के लिए यह दुःस्वप्न से कम नहीं था। चारों ओर मातम पसरा हुआ था, आँसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
स्वास्थ्य मंत्री जब शोक संतप्त परिवार से मिलने पहुँचे, तो माहौल बेहद गमगीन था। लेकिन तभी एक और अनहोनी ने सबको झकझोर कर रख दिया। मृतक की माँ सुरजमनी मरांडी की हालत अचानक बिगड़ने लगी। दर्द और सदमे से उनका शरीर जवाब देने लगा, साँसें थमने लगीं, नब्ज रुक गई, धड़कनें थम गईं। ऐसा लगा जैसे बेटे के गम में माँ भी हमेशा के लिए चली जाएगी। वहाँ मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही मंत्री जी आगे बढ़े।
यहाँ मंत्री जी का एक अलग ही रूप देखने को मिला—न सिर्फ एक जनप्रतिनिधि, बल्कि एक कुशल और संवेदनशील डॉक्टर। उन्होंने बिना एक पल गँवाए तुरंत सीपीआर देना शुरू किया। हर सेकंड कीमती था। लोगों की साँसे भी मानो थम गई थीं, सबकी निगाहें मंत्री जी पर टिकी थीं। कुछ ही पलों में जो चमत्कार हुआ, वह शब्दों से परे था। अचानक माँ की धड़कनें लौट आईं, आँखों में हल्की हरकत हुई और कुछ ही देर में उनकी साँसें फिर से चलने लगीं। यह किसी करिश्मे से कम नहीं था!
*गाँववालों की आँखों में आँसू थे, लेकिन इस बार ये आँसू राहत और कृतज्ञता के थे। सभी ने मंत्री जी को मसीहा कहकर पुकारा। लेकिन मंत्री जी ने यहाँ ही रुकने का नाम नहीं लिया। उन्होंने तुरंत तीन और डॉक्टरों को बुलाया और इलाज की पूरी व्यवस्था करवाई। उनकी तत्परता और संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया कि उनके लिए राजनीति सिर्फ कुर्सी तक सीमित नहीं, बल्कि यह जनसेवा का माध्यम है।*
*गाँव के लोगों के लिए मंत्री जी केवल एक नेता नहीं —वह एक संरक्षक, एक सच्चे जनसेवक और एक कुशल डॉक्टर के रूप में उभरकर सामने आए हैं। उनकी कार्यशैली ने यह दिखा दिया कि वह गरीबों और जरूरतमंदों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उनके प्रयासों से ना सिर्फ एक माँ की जान बची, बल्कि लोगों के दिलों में उनके लिए सम्मान और भी बढ़ गया।*
*मंत्री जी ने पीड़ित परिवार को ढांढस बँधाया और उनकी हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। इसके साथ ही, उन्होंने प्रशासन को आदेश दिया कि जहाँ हादसा हुआ, वहाँ स्पीड ब्रेकर बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा ना हों।*
*मंत्री जी ने कहा—”आप लोगों ने मुझे एक जनसेवक के रूप में चुना है, और मेरे लिए यह गर्व की बात है कि मेरे डॉक्टर होने का लाभ भी जनता को मिल रहा है। मैं जामताड़ा की जनता का हृदय से आभार प्रकट करता हूँ, जिन्होंने मुझ पर अटूट विश्वास रखा है। राहुल गांधी जी, हेमंत सोरेन जी और कांग्रेस पार्टी हमेशा गरीबों, जरूरतमंदों और पीड़ितों के साथ खड़ी है। जनसेवा और हर जीवन की रक्षा हमारी सरकार की प्राथमिकता है।”*
यह घटना केवल एक माँ की जान बचाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह साबित कर दिया कि जब सही हाथों में नेतृत्व होता है, तो वह सिर्फ शासन नहीं करता, बल्कि हर दुख में साथी बनकर खड़ा रहता है। मंत्री जी का यह रूप, उनकी करुणा, उनका समर्पण—यह सब इस बात का प्रमाण है कि सच्चा नेता वही है, जो लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहता है।

















