नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाया, हिंसक प्रदर्शनों में 19 की मौत, 300 से अधिक घायल
नेपाल सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंध को तुरंत प्रभाव से हटा लिया है। यह फैसला हिंसक प्रदर्शनों के बाद लिया गया, जिसमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 300 से अधिक लोग घायल हुए। मुख्य रूप से युवाओं द्वारा आयोजित ‘जनरेशन जेड’ (Gen Z) प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, आर्थिक असमानता और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ सड़कों पर उतरकर सरकार पर दबाव बनाया था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रदर्शन मुख्य रूप से काठमांडू के संसद भवन के आसपास केंद्रित थे, जहां हजारों युवा स्कूल-कॉलेज यूनिफॉर्म में सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने “सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाओ, भ्रष्टाचार बंद करो” जैसे नारे लगाए। जब प्रदर्शनकारी संसद परिसर में घुसने की कोशिश करने लगे, तो पुलिस ने पानी की बौछारें, आंसू गैस, रबर बुलेट्स और गोलीबारी की, जिससे हिंसा भड़क उठी। काठमांडू में 17 लोगों की मौत हुई, जबकि पूर्वी शहर इटाहारी में दो अन्य की जान गई।
4 सितंबर को नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब, एक्स (पूर्व ट्विटर), रेडिट और लिंक्डइन सहित 26 प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार का कहना था कि ये कंपनियां सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद रजिस्ट्रेशन, कर भुगतान और स्थानीय नियमों का पालन नहीं कर रही थीं। उद्देश्य फेक न्यूज, घृणा भाषा, ऑनलाइन धोखाधड़ी और नफरत फैलाने वाले फर्जी अकाउंट्स पर अंकुश लगाना था।
नेपाल के युवा, जो सोशल मीडिया पर समाचार, मनोरंजन और विदेशों में काम करने वाले परिवारों से संपर्क के लिए इन प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर हैं, ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना। टिकटॉक (जो पहले से रजिस्टर्ड है) पर वायरल वीडियो में राजनेताओं के बच्चों की लग्जरी लाइफस्टाइल और आम जनता की गरीबी की तुलना ने आग में घी डाला।
प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और संसद में घुसने की कोशिश की। पुलिस ने रबर बुलेट्स और लाइव फायरिंग की, जिसमें सिर और छाती पर गोली लगने से कई मौतें हुईं। नेशनल ट्रॉमा सेंटर में 7 शव पहुंचे, जबकि सिविल सर्विस हॉस्पिटल और काठमांडू मेडिकल कॉलेज में दर्जनों घायल भर्ती हैं। कुल 347 घायलों का इलाज चल रहा है, जिसमें 28 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रिथ्वी सुब्बा गुरुंग ने आपात कैबिनेट बैठक के बाद घोषणा की, “Gen Z की मांगों का सम्मान करते हुए प्रतिबंध हटा लिया गया है। प्लेटफॉर्म्स धीरे-धीरे बहाल हो जाएंगे।” प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा, “हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में हैं। हिंसा के लिए जिम्मेदार ‘वेस्टेड इंटरेस्ट ग्रुप्स’ को दोषी ठहराया जाएगा।” सरकार ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा, घायलों को मुफ्त इलाज और 15 दिनों में जांच समिति गठित करने का वादा किया है।
नेपाल में 13.5 मिलियन फेसबुक यूजर्स और 3.6 मिलियन इंस्टाग्राम यूजर्स हैं। 7.5% आबादी विदेशों में काम करती है, जो व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर है। भ्रष्टाचार और आर्थिक मंदी के खिलाफ युवाओं का गुस्सा लंबे समय से पनप रहा था, और सोशल मीडिया बैन ने इसे भड़का दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नेपाल की नई पीढ़ी की “क्रांति” का प्रतीक है, जो श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे आंदोलनों से प्रेरित है।
















