नेपाल के बाद फ्रांस में भड़की हिंसा: मैक्रों सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग
नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इन प्रदर्शनों ने फ्रांस को अराजकता की ओर धकेल दिया है, जिसमें आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ हिंसक झड़पें देखने को मिल रही हैं।
प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति मैक्रों की आर्थिक नीतियों और हाल ही में नए प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू की नियुक्ति से नाराज हैं। मंगलवार, 9 सितंबर को पूर्व प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरो को अविश्वास प्रस्ताव के बाद हटाए जाने के बाद मैक्रों ने लेकोर्नू को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया। यह फैसला जनता को रास नहीं आया, जिसके बाद ‘ब्लॉक एवरीथिंग’ नामक आंदोलन ने जोर पकड़ा। प्रदर्शनकारी मैक्रों की नीतियों को आम जनता के खिलाफ और अमीर वर्ग के पक्ष में मानते हैं। इसके अलावा, प्रस्तावित बजट कटौती और खराब वित्तीय प्रबंधन ने भी लोगों के गुस्से को भड़काया है।
बुधवार सुबह से पेरिस, रेन्स, बोर्डो और मार्सिले जैसे शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया, कचरा डिब्बों और वाहनों में आग लगा दी, और पुलिस पर पथराव, बोतलें और फ्लेयर्स फेंके। पेरिस के प्रमुख रेलवे हब गारे दू नॉर स्टेशन पर भी प्रदर्शनकारियों ने हमला किया। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सुपरमार्केट, तेल डिपो और पेट्रोल पंपों को निशाना बनाया, जिससे हालात और बिगड़ गए। सोशल मीडिया पर कुछ समूहों ने तो दुकानों में लूटपाट की अपील तक की है।
फ्रांस सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए देशभर में 80,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और बल प्रयोग के जरिए भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की, लेकिन कई जगहों पर प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर पुलिस से भिड़ गए। फ्रांस के आंतरिक मंत्रालय के अनुसार, विरोध प्रदर्शन शुरू होने के कुछ ही घंटों में लगभग 200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
यह विरोध प्रदर्शन 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन की याद दिला रहा है, जब लोग ईंधन करों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। मौजूदा आंदोलन में भी प्रदर्शनकारी आर्थिक असमानता और सरकार की सख्त नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। दीवारों पर लिखे नारे जैसे “मैक्रों दफा हो जाओ!” और “मैक्रों और तुम्हारी दुनिया…दफा हो जाओ!” प्रदर्शनकारियों के गुस्से को साफ दर्शाते हैं।
नेपाल में हाल ही में सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जेन-जेड प्रदर्शनकारियों ने हिंसक आंदोलन किया, जिसके दबाव में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। फ्रांस में भी ‘ब्लॉक एवरीथिंग’ आंदोलन ने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को एकजुट किया है, और यह आंदोलन नेपाल की तर्ज पर हिंसक रूप ले रहा है। हालांकि, फ्रांस में अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

















