बारबेंदिया पुल निर्माण संधर्ष समिति के तत्वावधान में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया.

बारबेंदिया पुल निर्माण संधर्ष समिति के तत्वावधान में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया.

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जामताड़ा : अनुमंडल कार्यालय जामताड़ा के समक्ष बारबेंदिया पुल निर्माण संधर्ष समिति के तत्वावधान में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन हुआ। धरना-प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारीयों ने साल 2009 से अधूरे पड़े वीरगांव -बारबेंदिया पुल निर्माण करवाने की मांग की है। बताते चले की ग्रामीण विकास विभाग (विशेष कार्य प्रमंडल) धनबाद से 20 जनवरी 2008 को पुल निर्माण आरंभ हुआ था। इस बीच 20 अगस्त 2009 को निर्माण के दौरान ही वीरगांव -बारबेंदिया पुल का दो पीलर पानी में बह गया। जबकि दो अन्य पीलर पानी के तेज बहाव में झूक गया। इसके बाद पुल के पीलर बह जाने की घटना को लेकर जांच आरंभ हुआ।

जांच के क्रम में पुल के पीलर के 64.33 फीट पाइलिंग करना था। लेकिन कार्य कर रहे संवेदक ने 22 फीट में पाइलिंग कर दिया था। हार्ड रॉक नही मिलने के बावजूद पीलर की पाइलिंग कर दिया गया था। यही वजह है कि निर्माण के दौरान ही पुल का 56 पीलर में से दो पीलर पानी के तेज बहाव को सह नही सका और पिलर बह गया था। पुल की लंबाई 1433 मीटर उस समय रखी गई थी। मौके पर पुल निर्माण संधर्ष समिति के अध्यक्ष अशोक महतो ने कहा कि अधूरे पुल होने के कारण जामताड़ा जिले के लोगों को निरसा जाने के लिए 35 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ती है।यानि कि वीरगांव -बारबेंदिया के रास्ते जामताड़ा व निरसा के बीच की दूरी महज 25 किलोमीटर है।जबकि चित्तरंजन, मैथन के रास्ते घूमकर निरसा जाने के लिए 60 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। लिहाजा साहेबगंज, दुमका, जामताड़ा व संथाल परगना के अन्य जिले के लोगों को निरसा जीटी रोड तक पहुंचने के लिए 35किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है और नहीं तो जान जोखिम में डालकर नाव के सहारे बारबेंदिया पहुंचना पड़ता है। इस दौरान हादसे का भी भय सताता रहता है।

जामताड़ा, कार्तिक सिंह

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