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बड़ा झटका! दिल्ली हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की ‘नौकरी के बदले जमीन’ घोटाले में याचिकाएं खारिज कीं, ट्रायल का रास्ता साफ

नई दिल्ली: राजद सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यायमूर्ति रविंद्र दुडेजा की एकल पीठ ने लालू यादव द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उन्होंने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और उसके बाद दाखिल तीन चार्जशीट को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है।

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लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ वकीलों (कपिल सिब्बल सहित) ने तर्क दिया था कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत अनिवार्य पूर्व मंजूरी (prior sanction) लिए बिना ही जांच शुरू की। उन्होंने पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा पुराने मामले को जानबूझकर अब तूल दिया जा रहा है।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने इन तकनीकी दलीलों को फिलहाल स्वीकार नहीं किया और मामले की गंभीरता को प्राथमिकता दी। अदालत ने याचिकाओं को बेबुनियाद और बिना मेरिट वाला बताते हुए खारिज कर दिया।

सीबीआई ने अदालत में कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं, जिनसे साबित होता है कि 2004-2009 के दौरान रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने पद का दुरुपयोग किया। रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से बेहद कम कीमत पर या मुफ्त में जमीनें लिखवाई गईं। ये जमीनें लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और परिवार की अन्य कंपनियों के नाम पर हस्तांतरित की गईं।

दिल्ली उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद अब राउज एवेन्यू कोर्ट में मामले का ट्रायल बिना किसी अड़चन के आगे बढ़ेगा। ट्रायल कोर्ट पहले ही मामले में संज्ञान ले चुका है और लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती समेत अन्य आरोपियों को समन जारी कर चुका है। हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद आरोपियों के पास अब केवल सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प बचा है।

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