रांची पुलिस ने पत्रकार से छिनतई और मारपीट की कोशिश में शामिल दो आरोपी को किया गिरफ्तार, अपराध में इस्तेमाल बाइक बरामद
रांची पुलिस ने पत्रकार से छिनतई और मारपीट की कोशिश में शामिल दो आरोपी को किया गिरफ्तार, अपराध में इस्तेमाल बाइक बरामद
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
रांची, 7 जनवरी : राजधानी रांची के कोकर क्षेत्र में दो पत्रकार जो ड्यूटी से घर लौट रहे थे उनमे से एक पत्रकार के साथ मारपीट और मोबाइल-पैसे छीनने की कोशिश की घटना का सदर थाना ने जल्द ही खुलासा किया है। पुलिस ने घटना में शामिल दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अपराध में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल को बरामद कर लिया है। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है।
घटना 7 जनवरी 2026 की रात करीब 1 बजे सुभाष चौक, कोकर के पास हुई। पीड़ित पत्रकार मुकेश कुमार ड्यूटी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान मोटरसाइकिल (रजिस्ट्रेशन नंबर JH05CW-7339) पर सवार दो व्यक्तियों ने उनसे मारपीट की और मोबाइल फोन तथा पैसे छीनने की कोशिश की। इतना ही नही पत्रकार के साथ ऐसी पिटाई की जिसे देखने के बाद आंखों में आंसू आ जाते है । मामले में सदर थाना में कांड संख्या 06/25 दर्ज किया गया है, जिसमें BNS की धारा 126(2), 115(2), 117(2), 109(1), 304(2) और 62 लागू की गई हैं।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से दोनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:ऋषभ कुमार (उम्र 23 वर्ष, पिता- दीपक कुमार, मूल पता- गोह सरैया, थाना- गोह, जिला- औरंगाबाद, बिहार; वर्तमान पता- तिरिल नियर तालाब के पास, रांची)।
मनीष कुमार (उम्र 23 वर्ष, पिता- राजेश महतो, मूल पता- तोपा तोयरा, थाना- मांडू, जिला- रामगढ़; वर्तमान पता- तिरिल नियर तालाब के पास, रांची)।
पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल मोटरसाइकिल (JH05CW-7339) को भी जप्त कर लिया है।छापेमारी टीम का नेतृत्व सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार ने किया। टीम में सअनि गोपाल दास, सदर थाना सशस्त्र बल और पीसीआर-221 शामिल थे।
जानिए इन पत्रकारों के साथ मारपीट के जुर्म में अपराधियो पर जो BNS की धारा लगाई गई है वो क्या कहती है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं का विस्तार से वर्णनप्रेस विज्ञप्ति में उल्लिखित धाराएँ 126(2), 115(2), 117(2), 109(1), 304(2), 62 हैं। ये भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) 2023 की धाराएँ हैं,
धारा 126(2): अवैध संयम (Wrongful Restraint)परिभाषा: कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को उस दिशा में जाने से जानबूझकर रोकता है जिसमें उसका कानूनी अधिकार है, तो यह अवैध संयम कहलाता है।
सजा: साधारण कारावास जो 1 महीने तक हो सकता है, या 5,000 रुपये तक जुर्माना, या दोनों।
अन्य जानकारी: संज्ञेय (पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार कर सकती है), जमानती, किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय।
IPC से तुलना: IPC धारा 341 के समान।
उदाहरण: किसी को रास्ता रोककर आगे जाने से रोकना।
2. धारा 115(2): स्वेच्छा से चोट पहुंचाना (Voluntarily Causing Hurt)परिभाषा: कोई व्यक्ति जानबूझकर या यह जानते हुए कि उसकी हरकत से चोट लग सकती है, किसी को शारीरिक दर्द, रोग या अक्षमता पहुंचाता है।
सजा: किसी भी प्रकार का कारावास जो 1 वर्ष तक हो सकता है, या 10,000 रुपये तक जुर्माना, या दोनों।
अन्य जानकारी: गैर-संज्ञेय, जमानती, किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय।
IPC से तुलना: IPC धारा 323 के समान।
उदाहरण: मारपीट करके साधारण चोट पहुंचाना।
3. धारा 117(2): स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना (Voluntarily Causing Grievous Hurt)परिभाषा: कोई व्यक्ति जानबूझकर या यह जानते हुए गंभीर चोट (जैसे हड्डी टूटना, स्थायी अक्षमता, 20 दिन से अधिक गंभीर दर्द आदि) पहुंचाता है।
सजा: किसी भी प्रकार का कारावास जो 7 वर्ष तक हो सकता है, तथा जुर्माना।
अन्य जानकारी: संज्ञेय, जमानती (आधारभूत मामलों में), मजिस्ट्रेट या सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय।
IPC से तुलना: IPC धारा 325 के समान।
उदाहरण: गंभीर मारपीट से हड्डी टूट जाना।
4. धारा 109(1): अपराध करने का प्रयास (Attempt to Commit Offence – यहां संदर्भ में प्रयास)नोट: प्रेस में 109(1) लिखा है, लेकिन BNS में धारा 109 मुख्य रूप से हत्या का प्रयास (Attempt to Murder) है।
परिभाषा: कोई व्यक्ति हत्या करने के इरादे से कार्य करता है, लेकिन हत्या पूरी नहीं होती।
सजा: 10 वर्ष तक कारावास तथा जुर्माना; यदि चोट पहुंची तो आजीवन कारावास; जीवन भर कैद की सजा काट रहे व्यक्ति द्वारा यदि चोट पहुंची तो मृत्युदंड या शेष जीवन कारावास।
अन्य जानकारी: संज्ञेय, गैर-जमानती, सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय।
IPC से तुलना: IPC धारा 307 के समान।
उदाहरण: गोली चलाना लेकिन मौत न होना। (यदि सामान्य प्रयास है तो धारा 62 लागू होती है।)
5. धारा 304(2): छिनताई (Snatching)परिभाषा: चोरी को अचानक, तेजी से या बलपूर्वक किसी व्यक्ति से या उसके कब्जे से चल संपत्ति छीनना।
सजा: 3 वर्ष तक का कारावास तथा जुर्माना।
अन्य जानकारी: संज्ञेय, गैर-जमानती, किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय।
IPC से तुलना: IPC में अलग धारा नहीं थी (चोरी या डकैती के अंतर्गत आती थी); BNS में नई धारा जोड़ी गई।
उदाहरण: मोबाइल या चेन अचानक छीनकर भागना।
6. धारा 62: आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दंडनीय अपराधों का प्रयास करने की सजापरिभाषा: जहां कोई विशिष्ट सजा नहीं है, वहां आजीवन या अन्य कारावास से दंडनीय अपराध करने का प्रयास करने पर।
सजा: मूल अपराध की आधी सजा तक (आजीवन की आधी या सबसे लंबी अवधि की आधी), या जुर्माना, या दोनों।

















