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सरना धर्म कोड की मांग तेज: निशा भगत ने विरोध में कराया मुंडन , झारखंड में उभर रही उलगुलान की आहट

सरना धर्म कोड की मांग तेज: निशा भगत ने विरोध में कराया मुंडन , झारखंड में उभर रही उलगुलान की आहट

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रांची, 12 दिसंबर – झारखंड की राजधानी रांची में आज सरना धर्म कोड की मांग और बढ़ते धर्मांतरण के खिलाफ आदिवासी समाज ने ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन किया। केंद्रीय सरना समिति की उपाध्यक्ष एवं प्रमुख आदिवासी नेत्री निशा भगत ने राजभवन के सामने आयोजित एक दिवसीय धरने के दौरान अपने बाल मुंडवाकर सरकार के प्रति तीखा विरोध दर्ज किया।

धरने की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने की। मुंडन के बाद निशा भगत ने मीडिया से बातचीत में झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “राज्य में धर्मांतरण की रफ्तार तेज हो चुकी है। चंगाई सभाओं और लालच के जरिए आदिवासी बेटियों का अपमान हो रहा है। मिशनरी संस्थाएं वर्षों से सक्रिय हैं, लेकिन सरकार सब जानकर भी चुप्पी साधे हुए है।” भगत ने आगे खुलासा किया कि झारखंड की 28 आदिवासी आरक्षित विधानसभा सीटों में से 10 पर धर्मांतरित विधायक बैठे हैं, जो सरकार को सहारा दे रहे हैं।

“आदिवासी अस्मिता और धर्म की रक्षा के लिए मैंने यह बलिदान दिया है। यदि केंद्र सरकार तुरंत सरना धर्म कोड लागू नहीं करती, तो आने वाले दिनों में झारखंड उलगुलान की राह पर होगा,” उन्होंने चेतावनी भरी आवाज में कहा।

नेत्री एंजिल लकड़ा ने निशा भगत की तारीफ करते हुए कहा, “किसी महिला के लिए बाल सबसे बड़ा श्रृंगार होता है, लेकिन धर्मांतरण के खिलाफ इस संघर्ष में निशा भगत ने श्रृंगार नहीं, बल्कि संघर्ष चुना है।” फूलचंद तिर्की ने बताया कि यह आंदोलन अब पूरे झारखंड में फैल चुका है। “अगर मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो सरना समाज का यह आंदोलन और प्रचंड रूप ले लेगा।”धरना स्थल पर सैकड़ों आदिवासी महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए।

नारों से राजधानी की सड़कें गूंज उठीं –

“हमारा धर्म, हमारी पहचान – सरना कोड हमारी शान!”

सरना धर्म कोड की पृष्ठभूमि:
लंबी लड़ाई का नया अध्याय

सरना धर्म प्रकृति पूजा पर आधारित आदिवासी धार्मिक परंपरा है, जिसमें मुंडा, ओरांव, संथाल जैसे समुदाय जल-जंगल-जमीन को पवित्र मानते हैं। वर्षों से यह मांग उठ रही है कि जनगणना और सरकारी दस्तावेजों में सरना को अलग धर्म कोड के रूप में शामिल किया जाए, ताकि आदिवासी अपनी धार्मिक पहचान खोए बिना ST (अनुसूचित जनजाति) आरक्षण का लाभ ले सकें। झारखंड विधानसभा ने 2020 में इस पर प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इसे लागू नहीं किया। हाल के महीनों में आंदोलन तेज हुआ है। मई-जून 2025 में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राज्यव्यापी धरने आयोजित किए। 26 मई को कांग्रेस ने राजभवन के सामने धरना दिया,

2025 में रांची की ‘आदिवासी हुंकार रैली’ में निशा भगत को मंच से उतारने का विवाद भी हुआ, जिससे आदिवासी एकता पर सवाल उठे। आज का मुंडन विरोध इसी निरंतर संघर्ष का हिस्सा लगता है।

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