चेंबर ऑफ कॉमर्स से टूटती दुकानदारों की उम्मीदें, एक साल बाद भी ठोस पहल का अभाव
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा : सिमडेगा चेंबर ऑफ कॉमर्स की नई कार्यसमिति के गठन को लगभग एक वर्ष पूरा होने को है, लेकिन जिले के दुकानदारों में निराशा बढ़ती जा रही है। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि चेंबर अब तक अपने दायरे को सिर्फ सदस्यों तक सीमित रखे हुए है और गैर-सदस्य दुकानदारों को जोड़ने या उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस नीति नहीं बना सका है।

दुकानदारों के अनुसार, संगठन की ओर से व्यापारियों के हित में कोई प्रभावी योजना जमीन पर नहीं उतरी है। खासकर छोटे और गैर-सदस्य दुकानदार खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि चेंबर की जिम्मेदारी पूरे बाजार की होनी चाहिए, न कि केवल सदस्य व्यापारियों तक सीमित।
साप्ताहिक बंदी बना बड़ा विवाद
इस समय सबसे बड़ा मुद्दा साप्ताहिक बंदी को लेकर सामने आ रहा है। चेंबर द्वारा प्रत्येक मंगलवार को बाजार बंद रखने का निर्णय लिया गया है, लेकिन उद्योग विहीन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर आधारित सिमडेगा जिले में यह फैसला व्यापारियों पर भारी पड़ रहा है।
दुकानदारों का कहना है कि वे पहले ही आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। कोविड के बाद बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और मुनाफा घटा है। ऐसे में महीने में चार से पांच दिन दुकान बंद रखना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
नीति स्पष्ट नहीं, असमंजस बरकरार
साप्ताहिक बंदी को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कई दुकानदारों का आरोप है कि बंदी के दिन दुकान खोलने वालों को फोटो लेकर कार्रवाई की धमकी दी जाती है, हालांकि चेंबर अध्यक्ष मोती अग्रवाल ने ऐसे किसी निर्देश से इनकार किया है और इसे अनुचित बताया है। वहीं, दुकानदारों का सवाल है कि जब वे चेंबर के सदस्य ही नहीं हैं, तो वे उसके नियमों का पालन क्यों करें। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि चेंबर सभी दुकानदारों को अपना मानता है, लेकिन यह भावना जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रही।
व्यापार पर असर, समाधान की मांग
बंदी के असमान पालन से बाजार में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। कुछ दुकानें खुलती हैं तो कुछ बंद रहती हैं, जिससे अन्य दुकानदारों के सामने दुविधा खड़ी हो जाती है। व्यापारियों का कहना है कि इस स्थिति से बाजार की एकरूपता और ग्राहकों का भरोसा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों ने चेंबर से मांग की है कि वह जमीनी हकीकत को समझते हुए व्यावहारिक और सर्वसम्मत निर्णय ले। साथ ही, गैर-सदस्य दुकानदारों को जोड़ने और उनके हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए, ताकि बाजार में संतुलन और स्थिरता कायम रह सके।
















