सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: 1000 वर्षों की अटूट आस्था और सांस्कृतिक गौरव की गाथा : बीजेपी
झारखंड भाजपा ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर पूरे प्रदेश में भव्य आयोजन किए, जो भारत की सनातन संस्कृति की अजेयता का प्रतीक है। यह पर्व 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए पहले बड़े आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक क्षण पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने देशभर में शिव मंदिरों में जाकर भगवान शिव की आरती, जलाभिषेक और मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बाबूलाल मरांडी का संदेश: भारत की आत्मा पर प्रहार, लेकिन सनातन जड़ें अटल
झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश भाजपा प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने कहा, “विदेशी आक्रांताओं ने न केवल भारत की धन-संपदा को लूटा, बल्कि भारत के मान-बिंदुओं पर भी प्रहार किया। मोहम्मद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर से हीरे-जवाहरात, सोना-चांदी लूटे और अद्वितीय शिवलिंग पर चोट की। यह भारत की आत्मा पर हमला था। लेकिन सनातन संस्कृति की जड़ें पाताल तक हैं। आक्रांताओं की कोशिशें विफल रहीं, वे खुद समय के साथ मिट गए। आज सोमनाथ की पुनर्स्थापना के 1000 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, जबकि दुनिया की कई संस्कृतियां लुप्त हो गईं, भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान पर अडिग खड़ा है।”
आदित्य साहू: मोदी सरकार संकल्पित है भारत के स्वाभिमान को जगाने के लिए
प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने अपने पैतृक गांव के शिवालय में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। उन्होंने कहा, “शिव सत्य है, सुंदर है, अटल हैं, अविनाशी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का सांस्कृतिक गौरव पुनर्स्थापित हो रहा है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ और महाकाल उज्जैन कॉरिडोर का निर्माण सनातन संस्कृति की महिमा को मंडित कर रहा है। मोदी सरकार भारत के स्वाभिमान और सम्मान को जगाने के लिए पूर्ण रूप से संकल्पित है।”
कर्मवीर सिंह: युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना आवश्यक
प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने रांची के पहाड़ी बाबा मंदिर में पूजन, आरती और जलाभिषेक किया। उन्होंने कहा, “आज ऐतिहासिक दिन है। विशेषकर युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत का परिचय जानना आवश्यक है। सनातन मान-बिंदु भारत की पहचान हैं। सोमनाथ भारत का आध्यात्मिक केंद्र है, जो धार्मिक ऊर्जा का प्रतीक है।”
सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है, जो गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित है। 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद मंदिर कई बार नष्ट हुआ, लेकिन हर बार पुनर्निर्मित हुआ। वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण स्वतंत्र भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से 1951 में पूरा हुआ, जिसकी प्राण-प्रतिष्ठा राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की। 2026 में इस पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूर्ण हो रहे हैं।
यह पर्व (8 से 11 जनवरी 2026) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में मनाया जा रहा है, जो भारत की सनातन संस्कृति की अटूटता और स्वाभिमान की जीत का उत्सव है।

















