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रसोइया-संयोजिका संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल से मध्यान्ह भोजन योजना चरमरा गई, बच्चे और शिक्षक खुद बना रहे खाना

शंभू कुमार सिंह 

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सिमडेगा : झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोइया संयोजिका अध्यक्ष संघ के आह्वान पर राज्यभर में चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर सिमडेगा जिले के सरकारी विद्यालयों में साफ दिख रहा है। रसोइयाओं के हड़ताल पर चले जाने से मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) योजना बुरी तरह प्रभावित हो गई है। कई स्कूलों में बच्चे खुद जान जोखिम में डालकर खाना बना रहे हैं, जबकि शिक्षकों को पढ़ाई-लिखाई छोड़कर इस योजना को चलाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

शुक्रवार को झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोइया संयोजिका अध्यक्ष संघ की जिला अध्यक्ष संध्या देवी ने जिले के विभिन्न विद्यालयों का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने देखा कि शिक्षक और बच्चे मिलकर मध्यान्ह भोजन बनाने में जुटे हुए हैं, जिससे स्कूलों में पठन-पाठन का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

संध्या देवी ने कहा, “शिक्षक मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए हैं या पढ़ाने के लिए? यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गरीब रसोइयों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, और अब उनके बच्चों से ही खाना बनवाया जा रहा है। अधिकारियों के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन गरीब बच्चों के साथ ऐसा अन्याय हो रहा है। इससे हमारे बच्चों का भविष्य क्या होगा?”

उन्होंने बताया कि रसोइया 2004 से सरकारी स्कूलों में खाना बनाने का काम कर रही हैं, लेकिन सरकार ने उनकी लंबित मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पिछले चार महीनों से संयोजिकाओं को मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। परिवारों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

संध्या देवी ने सरकार की मैय्या सम्मान योजना का जिक्र करते हुए कहा, “सरकार घर बैठी महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये दे रही है, लेकिन हम सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्कूल में खाना बनाती हैं और हमारा मानदेय बहुत कम है। हमारा भी परिवार है, बच्चे हैं, घर चलाना है।”

रसोइया संयोजिका की मुख्य मांगों में रसोइयाओं का स्थायीकरण किया जाए, मनरेगा के बराबर मजदूरी (सरकारी मजदूरी) घोषित की जाए, कुकिंग कॉम्पिटिशन में राज्य स्तर पर प्रथम आने वाली रसोइयाओं को जल्द पुरस्कृत किया जाए, पिछले बकाया मानदेय का भुगतान हो और अन्य लंबित मांगों जैसे बीमा, पेंशन आदि पर विचार शामिल हैं।

संध्या देवी ने सरकार से अपील की कि रसोइयाओं की समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए, अन्यथा हड़ताल और तेज होगी। राज्य में यह हड़ताल कई जिलों में जारी है, और इससे लाखों बच्चों की पोषण योजना प्रभावित हो रही है।

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