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वक्फ संशोधन बिल लोकसभा से पास, गुरुवार को राज्यसभा में होगा पेश , देश मे चौकसी बढ़ाई गई।

मोदी सरकार ने वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में पास हो गया है लोकसभा में इस बिल पर वोटिंग हुई। जिसमें बिल संशोधन के पक्ष में 288 और बिल के खिलाफ 232 वोट पड़े। गुरुवार को यह राज्यसभा में पेश होगा  ।  देश मे सुरक्षा कड़े कर दिए गए है । फिलहाल यह बिल  चर्चा का विषय बना हुआ है । संशोधन बिल होने की शुरूआत से लोकसभा में हुई  चर्चा  बात को समझते है।
बिल पेश करने की शुरुआत
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सुबह 12 बजे के बाद लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को पेश किया। इसे “उम्मीद” (यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, इम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) नाम दिया गया। बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने पहले ही मंजूरी दे दी थी, जिसमें 44 संशोधनों पर चर्चा के बाद 14 को स्वीकार किया गया था। रिजिजू ने अपने 58 मिनट के भाषण में कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और दुरुपयोग रोकने के लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि अगर यह संशोधन पहले नहीं लाया जाता, तो “संसद की इमारत भी वक्फ की संपत्ति घोषित हो सकती थी।”

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लोकसभा में चर्चा का विस्तार
2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर चर्चा बेहद गर्मजोशी और तनावपूर्ण माहौल में हुई। यह चर्चा सुबह 12 बजे शुरू हुई और देर शाम तक चली। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। और 8 घंटे के समय को बढ़ा दिया गया।
सत्ता पक्ष की ओर से बहस
किरेन रिजिजू का उद्घाटन भाषण:
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल को पेश करते हुए कहा कि यह वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने और प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी है।
उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, “अगर यह बिल पहले नहीं आता, तो शायद संसद भवन को भी वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाता।”
रिजिजू ने जोर देकर कहा कि यह बिल किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि गरीब मुस्लिम महिलाओं और बच्चों के हित में है, जिन्हें वक्फ संपत्तियों से लाभ नहीं मिल पाता।
बीजेपी सांसदों का समर्थन:
बीजेपी के कई सांसदों ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को खत्म करने के लिए यह कदम जरूरी है।
एक सांसद ने दावा किया कि वक्फ संपत्तियों का इस्तेमाल “गैर-कानूनी गतिविधियों” के लिए हो रहा है, जिसे रोकना सरकार का दायित्व है।
विपक्ष की आपत्तियाँ
कांग्रेस का विरोध:
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बिल को “संघीय ढांचे पर हमला” करार दिया। उनका कहना था कि यह राज्य सरकारों के अधिकारों का हनन करता है, क्योंकि वक्फ राज्य सूची का विषय है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस बिल के जरिए “ध्रुवीकरण” की कोशिश कर रही है।
सपा और AIMIM की तीखी प्रतिक्रिया:
समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने इसे “संविधान विरोधी” बताया।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिल को “असंवैधानिक” और “मुस्लिम विरोधी” करार दिया। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों पर गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का प्रावधान समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन है।
अन्य विपक्षी दलों की राय:
टीएमसी और डीएमके ने भी बिल का विरोध किया। टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि जेपीसी में चर्चा के दौरान विपक्ष की कई सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया।
चर्चा के दौरान हंगामा
बहस के दौरान कई बार हंगामे की स्थिति बनी। ओवैसी और बीजेपी सांसदों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके कारण स्पीकर ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा।
विपक्षी सांसदों ने “वक्फ बचाओ” के नारे लगाए, जबकि सत्ता पक्ष ने “भ्रष्टाचार मिटाओ” का जवाब दिया।
बिल के प्रमुख प्रावधानों पर बहस
गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति: बिल में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान विपक्ष के लिए सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा रहा।
जिला कलेक्टर की भूमिका: संपत्ति विवादों में जिला कलेक्टर को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार देने पर विपक्ष ने आपत्ति जताई।
डिजिटलाइजेशन और पारदर्शिता: सत्ता पक्ष ने इसे सकारात्मक कदम बताया, लेकिन विपक्ष ने इसे “निगरानी का हथियार” करार दिया।
वक्फ बोर्ड के किसी भी आदेश को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी: गृह मंत्री शाह

इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा की “वक्फ बोर्ड की लीज पर दी गई संपत्तियों की संख्या 20,000 थी, लेकिन 2025 के रिकॉर्ड बताते हैं कि यह आंकड़ा शून्य है। ये संपत्तियां कहां गईं? उन्हें बेच दिया गया। किसकी अनुमति से उन्हें बेचा गया? अब रिपोर्ट पेश करनी होगी, बैलेंस शीट की समीक्षा होगी, सेवानिवृत्त सीएजी अधिकारी ऑडिट करेंगे और पारदर्शिता आएगी। पारदर्शिता से किसी को क्यों डरना चाहिए? वक्फ बोर्ड या परिषद के किसी भी आदेश को भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। इस प्रावधान को आपने (कांग्रेस) खत्म कर दिया था और कहा था कि ऐसे आदेशों को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर लोकसभा में अपना वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा।

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