विश्व हाथी दिवस विशेष: हाथी-मानव संघर्ष बना चुनौती, पांच हाथियों और ग्रामीणों की मौत, वन विभाग ने शुरू की जागरूकता पहल
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा : विश्व हाथी दिवस के अवसर पर जहां पूरी दुनिया में हाथियों के संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है, वहीं झारखंड के सिमडेगा जिले में हाथी-मानव संघर्ष एक गंभीर समस्या बना हुआ है। जिले में हाथियों के लगातार आवागमन और कॉरिडोर के रूप में उपयोग ने न केवल ग्रामीणों की फसलों और घरों को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में पांच हाथियों और 5-7 ग्रामीणों की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद, सुरक्षित कॉरिडोर और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस कदमों का अभाव चिंता का विषय बना हुआ है।
सिमडेगा: हाथी कॉरिडोर और मानव-हाथी संघर्ष
सिमडेगा जिला, जो सारंडा वन, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के जंगलों के बीच एक महत्वपूर्ण हाथी कॉरिडोर के रूप में जाना जाता है, में साल भर हाथियों का आवागमन बना रहता है। सूत्रों के अनुसार, झुंड में या भटके हुए हाथी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवेश कर फसलों को नष्ट करते हैं और घरों में रखे धान व अन्य खाद्यान्न को खा जाते हैं। गुस्सैल हाथियों के हमले में हर साल औसतन 5-7 ग्रामीण अपनी जान गंवाते हैं। दूसरी ओर, हाथी भी सुरक्षित नहीं हैं। डेढ़ दशक पहले भेलवाडीह में नक्सलियों द्वारा तस्करी के लिए एक हाथी की गोली मारकर हत्या की गई थी। इसके अलावा, करंट लगने जैसे विभिन्न कारणों से अब तक जिले में पांच हाथियों की मौत हो चुकी है।
वन विभाग की पहल, लेकिन समाधान अधूरा
हाथी-मानव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन ये प्रयास अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। विश्व हाथी दिवस के मौके पर सिमडेगा वन विभाग ने ठेठईटांगर प्रखंड के जामपानी गांव में हाथी भगाने के लिए मशाल सामग्री (जूट बोरा, मोबिल आदि) का वितरण किया। डीएफओ शशांक शेखर सिंह के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और ग्रामीणों को जागरूक करते हुए मशाल और बम लाइट जैसे उपकरणों का उपयोग करने की सलाह दी। ग्रामीणों को सलाह दी गई कि वे हाथियों के करीब न जाएं और सुरक्षित स्थान पर रहकर मशाल का उपयोग करें।
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि ये उपाय केवल अस्थायी हैं। सुरक्षित कॉरिडोर की स्थापना और ग्रामीणों को सुरक्षित क्षेत्रों में बसाने जैसे दीर्घकालिक समाधानों पर न तो वन विभाग ने कोई ठोस पहल की है और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है।
ग्रामीणों और हाथियों की सुरक्षा पर सवाल
हाथियों के हमले से ग्रामीणों के घर, फसल और खाद्यान्न को भारी नुकसान होता है। खेतों में खड़ी फसलें और घरों में रखा अनाज हाथियों का आहार बन जाता है। ठेठईटांगर के जोराम और जामपानी जैसे क्षेत्रों में हाल ही में हाथियों का झुंड घुस आया है, जिससे ग्रामीण दहशत में हैं। दूसरी ओर, नक्सली गतिविधियों और करंट जैसे खतरों ने हाथियों की जान को भी जोखिम में डाल रखा है।
विश्व हाथी दिवस पर संदेश
विश्व हाथी दिवस के मौके पर यह जरूरी है कि सिमडेगा में हाथी-मानव संघर्ष को कम करने के लिए ठोस और दीर्घकालिक उपाय किए जाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित कॉरिडोर का निर्माण, ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ-साथ उनकी आजीविका के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, और वन्यजीव संरक्षण के लिए तकनीकी उपायों का उपयोग इस समस्या का समाधान हो सकता है।
सिमडेगा वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों से दूरी बनाए रखें और किसी भी आपात स्थिति में वन विभाग को तुरंत सूचित करें। विश्व हाथी दिवस के मौके पर यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है कि मनुष्य और हाथी दोनों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

















