विश्व हृदय दिवस के अवसर पर रिम्स रांची में किया गया कार्यक्रम आयोजित किया गया।

विश्व हृदय दिवस के अवसर पर रिम्स रांची में किया गया कार्यक्रम आयोजित किया गया।

आज दिनांक 29 सितम्बर 2021 को विश्व हृदय दिवस के अवसर पर सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में कार्यकम का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. प्रशांत कुमार , कार्डियोलाजिस्ट , रिम्स, डॉ. विनोद कुमार , सिविल सर्जन राँची, डॉ आर एन शर्मा , अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, डॉ शशि भूषण खलखो, डॉ एके झा एवं स्वास्थ्यकर्मी शामिल हुए । कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हृदय को स्वस्थ्य रखने के साथ हृदय रोग के खतरे को कम करने के लिए प्रेरित और जागरूक करना था ताकि हृदय से संबंधित बिमारियों को कम किया जा सके।
सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार ने कहा कि हार्ट को दुरूस्त रखने के लिए जीवन शैली एवं खानपान में बदलाव जरूरी है। लोगों को खाने में ट्रांस फैट कम करना चाहिए। सभी को कम से कम 6-7 घटे की नींद जरूर लेनी चाहिए और 30 मिनट का शारीरिक क्रियाकलाप जरूर करना चाहिए। 35 साल के बाद लोगों को समय पर हृदय से संबंधित जाँच करना चाहिए ताकि इसके खतरे से बचा जा सके।
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रिम्स के कार्डियोलाजिस्ट विभाग के डॉ प्रशांत कुमार ने कहा कि लोगों को हृदय एवं इससे संबंधित रोगों के प्रति जागरूक रहना एवं रिस्क फैक्टर को समझना जरूरी है। भारत में पुरुषों में हर 4 में से 1 की मौत एवं महिलाओं में हर 8 में से 1 की मौत हृदय रोग होती है । इसके कुछ प्रमुख लक्षणों में छाती भारीपन लगना, धड़कन का बढ़ना, सांस फूलना आदि शामिल हैं । परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर भी लोगों को समय-समय पर जांच कराना चाहिए। ECG एवं ECO Test से ह्रदय रोग के स्थिति के बारे में जानकारी मिलती है। युवाओं में हार्ट अटैक का एक महत्वपूर्ण कारण धुम्रपान है, जिसे कम करना जरूरी है। डॉ. आर एन शर्मा ने बताया कि पूरे विश्व में 18.6 % लोगों की हर साल मौत हृदय से संबंधित बिमारियों से होती है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन ने इस पर चिन्ता व्यक्त करते हुए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व हृदय दिवस मनाने की परंपरा शुरू की । प्रत्येक वर्ष 29 सितम्बर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। आज छोटी उम्र के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हृदय रोग से पीड़ित हो रहे हैं। लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है, इसके लिए लोग अपने जीवनशैली में थोड़ा सा सुधार लाकर रिस्क फैक्टर कम कर सकते हैं। हाइ बीपी, मधुमेह, हाइ कॉलेस्ट्रोल , कम शारीरिक श्रम, वायु प्रदूषण एवं मोटापा जैसे चीजों पर ध्यान देकर हृदय रोग और इसके खतरे को लोग कम कर सकते हैं। डॉ एके झा ने भी कहा कि आज के जीवन शैली में लोगों को तेजी से टहलने के साथ-साथ, खान -पान पर ध्यान देना चाहिए और लगातार, बीपी, मधुमेह एवं कॉलेस्ट्रोल की जांच कराना चाहिए। तेल – मसालेदार भोजन, हाइ बीपी और मधुमेह का बढ़ना हार्ट से संबंधित बीमारियों का मुख्य कारण है।वर्ल्ड हार्ट डे के अवसर पर सभी प्रखण्ड में कैम्प का आयोजन किया गया। जिसमें लोगों का बीपी, मधुमेह एवं कॉलेस्ट्रोल का जांच किया गया।
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