खुलेआम हो रही है अवैध बालू की निकासी

खनन विभाग मौन,इटखोरी के मुहाने नदी पुल के पिलर से खुलेआम हो रही है अवैध बालू की निकासी

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वरीय संवाददाता चंद्रेश शर्मा चतरा

चतरा। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त इटखोरी में खनन विभाग की मौन स्वीकृति के बालू खनन का अवैध उत्खनन और कारोबार खुलेआम फल फूल रहा है। इससे राज्य सरकार को भले ही लाखो के राजस्व का चूना लग रहा हो लेकिन खनन पदाधिकारी की नजर इस कुकृत्य पर नहीं पड़ रही है। अवैध बालू कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि यहां सुबह होते ही नदी से बालू उठाव प्रारंभ हो जाता है। इटखोरी प्रखण्ड के मुहाने नदी और पितीज के बसाने नदी से इन दिनों अवैध बालू का उठाव जोरों पर किया जा रहा है।इससे मुहाने नदी के साथ-साथ मां भद्रकाली मंदिर का भी अस्तित्व खतरे में है। चूंकि मंदिर के पीछे से गुजरी यु आकार की मुहाने नदी पर बालू माफियाओं की नजर लग गयी है। सबसे बड़ी बात यह है,कि मुहाने पुल के पिलर के नीचे से भी जोरों पर बालू का उठाव किया जा रहा है।जिससे पुल कभी भी बरसात के बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो सकता है। बुधवार सुबह दर्जनों की संख्या में ट्रैक्टरों का परिचालन मुहाने नदी बालू उत्खनन के लिए होता है। इससे नदियों का अस्तित्व भी समाप्त होने के कगार पर है और जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इटखोरी के मुहाने नदी और पितीज के बसाने नदी में अवैध रूप से बालू की उठाव को लेकर पहले भी अखबारों में खबरें आती रही हैं। बावजूद खनन विभाग इसपर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं करता दिख रहा है,जिसके कारण अवैध बालू कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। मालूम हो कि जिला खनन टास्क फोर्स की बैठक में उपायुक्त ने अवैध बालू की ढुलाई और अवैध बालू भंडारण से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर त्वरित कार्रवाई को लेकर जिला खनन पदाधिकारी समेत अनुमंडल पदाधिकारी चतरा, सिमरिया, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी एवं संबंधित थाना प्रभारी को निर्देश दिया है। वहीं पुलिस अधीक्षक ने सभी संबंधित अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी एवं थाना प्रभारी को पैनी नजर बनाए रखते हुए उक्त मामलों में त्वरित कार्रवाई का निर्देश दिया है। बताते चलें कि मुहाने नदी से बालू कारोबारियों को बालू खनन करने में प्रशासन और पुलिस का तनिक भी भय नहीं है। नदी का बालू, बालू कारोबारियों का काली कमाई का जरिया बन चुका है। इनके नेटवर्क और रसूख के आगे प्रशासन भी बौना साबित हो रहा है प्रशासन की छापेमारी से पहले ही बालू माफियाओं की सटीक जानकारी मिल जाती है। जब अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं इससे पहले ही कारोबारी फरार हो जाते हैं। इसे प्रमाणित होता है कि बालू माफियाओं का इन अधिकारियों से सांठगांठ कितना मजबूत है।

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