रांची—रिम्स अब जान गंवाने वाला अस्पताल बन गया है.

रांची—रिम्स अब जान गंवाने वाला अस्पताल बन गया है. क्योंकि यहां पर आने वाले मरीजों को जिंदगी नहीं, बल्कि मौत मिल रही है.

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कोडरमा के रहने वाले मरीज रामकुमार यादव की 2 दिन पहले अचानक तबीयत काफी खराब हो गई. मरीज कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से परिजन सीधा ट्रॉमा सेंटर के कोविड वार्ड पहुंचे. लेकिन न्यू ट्रॉमा सेंटर में मरीज को गंभीर बताकर डॉक्टरों ने परिजनों को पुराना इमरजेंसी भेज दिया. पुराना इमरजेंसी पहुंचने के बाद मरीज के परिजनों को यह कहा गया कि इतना सीरियस मरीज का इलाज यहां पर नहीं हो सकता, इस लिए इसे न्यू ट्रॉमा सेंटर ही लेकर जाएं और परिजन वापस मरीज को न्यू ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे. लेकिन यहां आखिर तक एडमिट नहीं ही लिया गया.

परिजन को रिम्स अस्पताल में जगह नहीं होने का हवाला देते हुए डॉक्टर ने डोरंडा भेज दिया. डोरंडा में भी मरीज को इलाज नहीं मिल पाया. जिसके बाद मरीज के परिजनों को डोरंडा से धुर्वा के पारस अस्पताल भेज दिया गया. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण मरीज गुरुवार को रात भर पारस अस्पताल में इलाज का इंतजार करता रहा, लेकिन वहां भी उस मरीज को इलाज नहीं मिल पाया. जिसके बाद मरीज के परिजन थक हारकर शुक्रवार सुबह फिर से रिम्स पहुंचे तो जरूर, लेकिन रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में घंटो तक इलाज के लिए मरीज तरसता रहा पर उसे इलाज नसीब नहीं हो पाया और आखिर में उसकी मौत हो गई.

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