रांची: रिम्स में नवजात बिरहोर की मौत, 40 मिनट तक नहीं मिला बेड! एंबुलेंस में तड़पता रहा मासूम!

रांची: रिम्स में नवजात बिरहोर की मौत, 40 मिनट तक नहीं मिला बेड! एंबुलेंस में तड़पता रहा मासूम!

रांची: रिम्स में नवजात बिरहोर की मौत, 40 मिनट तक नहीं मिला बेड ! एंबुलेंस में तड़पता रहा मासूम!

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झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने पत्रकारों को सरकारी मेडिकल कॉलेज या सरकारी अस्पतालों में घुसने पर पाबंदी लगा दी है ।  लेकिन जानते हैं क्यों ?   इसकी वजह हम बताते हैं इसकी वजह है झारखंड के सरकारी अस्पतालों में हो रहा करप्शन और लापरवाही । स्वास्थ्य मंत्री यह नहीं चाहते हैं कि झारखंड के अस्पतालों में हो रहा करप्शन और उनके अस्पतालों में हो रही मरीजों के साथ लापरवाही और खिलवाड़ जनता के सामने आ सके  । इसकी एक बानगी आज ही सामने आ गई  । दरअसल रांची के रिम्स में एक चार दिन के बिरहोर नवजात की सांसें आस्पताल की लापरवाही की भेंट चढ़ गईं ! जमशेदपुर से बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया यह मासूम सांस लेने की तकलीफ से जूझ रहा था, लेकिन रिम्स में उसे 40 मिनट तक बेड नहीं मिला। घंटों तक एंबुलेंस में वेंटिलेटर के इंतजार में तड़पते हुए आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

परिजनों का दर्द तब और बढ़ गया, जब सेंट्रल इमरजेंसी में कर्मियों ने उन्हें पीडियाट्रिक वार्ड जाकर बेड की उपलब्धता पूछने को कहा। बेड का पता लगाने के बाद जब बच्चे को पीडियाट्रिक वार्ड ले जाया गया, तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने बच्चे की जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया।
यह हृदयविदारक घटना रिम्स जैसे बड़े अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रबंधन की उदासीनता को उजागर करती है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एक मासूम की जान बचाने के लिए समय पर व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
यह मामला न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को दर्शाता है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर तबके के प्रति संवेदनहीनता को भी सामने लाता है। क्या इस मासूम की मौत जिम्मेदारों को झकझोरेगी, या यह सिर्फ एक और खबर बनकर रह जाएगी?

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