कोडरमा में दिल दहलाने वाली घटना: नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता ने रिम्स में तोड़ा दम, परिवार सदमे में

कोडरमा में दिल दहलाने वाली घटना: नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता ने रिम्स में तोड़ा दम, परिवार सदमे में

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कोडरमा में दिल दहलाने वाली घटना: नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता ने रिम्स में तोड़ा दम, परिवार सदमे में
कोडरमा, झारखंड: एक मासूम की जिंदगी को झकझोर देने वाली घटना ने पूरे चंदवारा थाना क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। 31 मई को हुई एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म की घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़ा, बल्कि समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए। रांची के रिम्स अस्पताल में इलाज के दौरान 11 जून 2025 को इस मासूम ने आखिरी सांस ली, जिसने अपने साथ एक दर्दनाक कहानी छोड़ दी।
क्या थी पूरी घटना?
पीड़िता के पिता के अनुसार, चंदवारा निवासी छोटेलाल पांडेय ने उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर गौरी नदी के पास ले गया और वहां रातभर उसके साथ दुष्कर्म किया। 1 जून को बदहवास हालत में गौरी नदी के किनारे मिली इस मासूम ने घर पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। इस घोर अपमान और मानसिक आघात को सहन न कर पाने के कारण, 3 जून को उसने घर में पंखे से लटककर आत्महत्या का प्रयास किया। परिजनों ने उसे तुरंत कोडरमा सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां से गंभीर हालत के कारण पहले हजारीबाग और फिर रांची के रिम्स रेफर किया गया।
इलाज के बावजूद नहीं बची जिंदगी
4 जून से रिम्स में जिंदगी और मौत से जूझ रही इस नाबालिग ने आखिरकार 11 जून को दम तोड़ दिया। पीड़िता के पिता ने बताया कि वे अपनी बेटी के इलाज में व्यस्त थे, जिसके कारण चंदवारा थाने में लिखित शिकायत 10 जून को दर्ज कराई गई। इस बीच, आरोपी छोटेलाल पांडेय फरार है, और उसकी तलाश में पुलिस ने छापेमारी तेज कर दी है।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी मुख्यालय रतिभान सिंह की अगुवाई में एक विशेष टीम गठित की गई है, जिसमें महिला थाना प्रभारी और चंदवारा थाना प्रभारी शामिल हैं। डीएसपी रतिभान सिंह ने बताया कि पीड़िता के आत्महत्या के प्रयास की सूचना मिलने के बाद पुलिस हरकत में आई, और अब आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। तकनीकी सेल की मदद से भी जांच को तेज किया गया है।
परिवार का दर्द और समाज के सवाल
पीड़िता के पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी को इंसाफ चाहिए। उसकी जिंदगी छीनने वाले को सजा मिलनी चाहिए।” इस घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़ा, बल्कि समाज में नाबालिगों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
आवाज उठाएं, इंसाफ की मांग करें
 आखिर कब तक मासूम बेटियां इस तरह की क्रूरता का शिकार होती रहेंगी? क्या समाज और प्रशासन मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे? इस दुखद घटना के बाद हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है – “कब मिलेगा इंसाफ?”
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