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हिमाचल प्रदेश में बादल फटने से भारी तबाही: 2 की मौत, 20 से अधिक लापता

हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत के साथ ही प्रकृति का प्रकोप देखने को मिला है। बुधवार, 25 जून को कुल्लू और कांगड़ा जिले में बादल फटने की कई घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। इन घटनाओं में कम से कम 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें, पुल, घर, और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।

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कुल्लू जिले के सैंज, गड्सा, मणिकर्ण, और बनजर क्षेत्रों में 3-4 स्थानों पर बादल फटने की खबरें हैं। सैंज घाटी के जीवा नाला और मणिकर्ण के ब्रह्मगंगा नाले में अचानक पानी का स्तर बढ़ने से कई घर, दुकानें, और सड़कें बह गईं। बनजर के हॉर्नागद क्षेत्र में एक पुल पूरी तरह ध्वस्त हो गया, और एक सरकारी स्कूल परिसर में पानी घुसने से खेतों और एक गौशाला को नुकसान पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार, कुल्लू में तीन लोग लापता हैं, और आठ वाहन, दस छोटे पुल, और एक बिजली परियोजना पूरी तरह नष्ट हो गई है।

कांगड़ा जिले के खनियारा गांव के पास मणुनी खड्ड में बादल फटने से एक निजी जलविद्युत परियोजना में कार्यरत 15-20 मजदूर बाढ़ में बह गए। अब तक दो शव बरामद किए गए हैं, लेकिन बाकी मजदूरों का पता नहीं चल सका। परियोजना स्थल पर अस्थायी शेड में रह रहे मजदूरों को बाढ़ का पानी बहाकर ले गया। कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि बचाव कार्य के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस, और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर तैनात हैं।

बचाव कार्य में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), SDRF, पुलिस, और स्थानीय प्रशासन की टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं। ड्रोन और भारी मशीनरी का उपयोग कर लापता लोगों की तलाश की जा रही है। कुल्लू के उपायुक्त आश्वनी कुमार ने बताया कि मणिकर्ण और जिभी जैसे क्षेत्रों में भी भारी नुकसान हुआ है। सैंज घाटी में सियुंड के पास सड़क बंद होने से लगभग 150 पर्यटक वाहनों में 2,000 से अधिक पर्यटक फंसे हुए हैं।

मौसम विभाग ने गुरुवार, 26 जून को चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, और सिरमौर जिलों में बाढ़ का जोखिम जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अगले चार दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पालमपुर में 145.5 मिमी, जोगिंदरनगर में 113 मिमी, और नाहन में 99.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। ब्यास और सतलुज नदियों का जलस्तर भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला पर्यटन क्षेत्र इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मणाली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा ब्यास नदी के कटाव से क्षतिग्रस्त हो गया। लाहौल-स्पीति में भूस्खलन से काजा-सामदोह मार्ग कई जगहों पर अवरुद्ध है। प्रशासन ने लोगों से नदियों और नालों से दूर रहने की अपील की है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु ने स्थिति का जायजा लेने के लिए आपात बैठक बुलाई। उन्होंने प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता के रूप में 50,000 रुपये और किराए के आवास के लिए तीन महीने तक 5,000 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की।

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