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सिमडेगा में 25 साल बाद फांसी की सजा, चार लोगों की हत्या का मुख्य आरोपी दोषी

शंभू कुमार सिंह 

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सिमडेगा जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पाकरटांड़ थाना कांड संख्या 09/2018 के तहत चार लोगों की नृशंस हत्या के मामले में मुख्य आरोपी संजय सोरेंग को फांसी की सजा सुनाई है। वहीं, हत्याकांड में शामिल दो सहयोगियों, निर्मल और पुनीत सोरेंग, को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। यह सजा सिमडेगा में 25 वर्षों बाद किसी को दी गई फांसी की सजा है।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार सिन्हा की अदालत में सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक अमर चौधरी ने बताया कि 17 मई 2018 को पाकरटांड़ थाना क्षेत्र के नोनगढ़ा गोंदलीपानी गांव में यह जघन्य वारदात हुई थी। राकेश सोरेंग अपने घर के पास घेराव का काम कर रहा था, तभी पड़ोसी संजय सोरेंग ने जमीन को लेकर विवाद शुरू किया। विवाद बढ़ने पर संजय ने राकेश पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। राकेश के कमजोर पड़ने पर संजय और उसके सहयोगियों निर्मल व पुनीत ने राकेश, उनकी पत्नी कार्मेला सोरेंग, गांव के निस्तोर सोरेंग और राकेश के 5 वर्षीय बेटे फिलमोन की टांगी से काटकर हत्या कर दी।

पुलिस ने घटना के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक द्वारा पेश किए गए साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने संजय सोरेंग को फांसी की सजा सुनाई, जबकि निर्मल और पुनीत को आजीवन कारावास की सजा दी।

गौरतलब है कि संजय सोरेंग को इससे पहले एक अन्य हत्या के मामले में एडीजे की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यह सजा सिमडेगा जिले में 25 वर्षों में पहली बार किसी को दी गई फांसी की सजा है।

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