जयशंकर का रूस दौरा: ट्रंप के टैरिफ के बाद वैश्विक कूटनीति के लिहाज से अहम
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में भारत पर टैरिफ बढ़ाने की घोषणा के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर का रूस दौरा वैश्विक कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
जयशंकर अपने रूस दौरे के दौरान रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। सूत्रों के अनुसार, भारत और रूस के बीच सामरिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर की उम्मीद है।
ट्रंप प्रशासन के हालिया टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों ने भारत को वैकल्पिक व्यापारिक साझेदारों की ओर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया है। रूस के साथ भारत का लंबे समय से मजबूत रणनीतिक और आर्थिक रिश्ता रहा है, और इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत को वैश्विक व्यापार युद्ध के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर देगा।
जयशंकर के दौरे में रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय सहयोग और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और अफगानिस्तान जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
यह दौरा न केवल भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक स्थिति को और सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


















