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सुहागिन महिलाओं ने हरितालिका तीज व्रत के साथ की पति की दीर्घायु की कामना

रामगढ़ : भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामगढ़ में सुहागिन महिलाओं ने हरितालिका तीज का व्रत बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ किया। इस पावन अवसर पर महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, आरोग्यता, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए निर्जला व्रत रखा और मंदिरों में पूजा-अर्चना की।

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शाम के समय शहर के विभिन्न मंदिरों में महिलाओं ने एकत्रित होकर हरितालिका तीज की कथा सुनी। पुजारियों ने इस व्रत के महत्व को बताते हुए कहा कि मां पार्वती ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घने जंगल में कठोर तपस्या की थी। जंगल के हरे-भरे स्वरूप के कारण इस व्रत को “हरितालिका” नाम दिया गया। यह व्रत वैवाहिक जीवन में स्थिरता, विश्वास, त्याग, सहयोग और समर्पण जैसे मूल्यों को मजबूत करता है।

इस व्रत के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में कर्तव्यों के निर्वहन के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा भी प्राप्त करती हैं। यह व्रत सहयोग और समृद्धि का वातावरण बनाता है, जिससे जीवन में उन्नति और खुशहाली प्राप्त होती है।

रामगढ़ शहर के प्रमुख मंदिरों जैसे श्री प्राचीन महावीर मंदिर (झंडा चौक), श्री वेनेश्वर महादेव, श्री सत्यनारायण मंदिर, किला मंदिर, पुरनी मंडप मंदिर, श्री रामेश्वर मंदिर, श्री जलाराम मंदिर सहित अन्य मंदिरों में महिलाओं ने पूजा-अर्चना की और दान-पुण्य किया। इस अवसर पर मंदिरों में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखा गया।

हरितालिका तीज का यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और पारिवारिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है। महिलाओं ने इस दिन अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मां पार्वती और भगवान शंकर से प्रार्थना की।

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