20250905 210332

7 सितंबर की रात होगा पूर्ण ग्रहण, जानें सूतक काल, दृश्यता और श्राद्ध से जुड़े नियम

साल 2025 का आखिरी चंद्रग्रहण 7 सितंबर की रात को लगने वाला है, जो एक पूर्ण चंद्रग्रहण होगा। यह ग्रहण भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 28 मिनट की होगी, जबकि पूर्ण ग्रहण का चरण रात 11:01 बजे से शुरू होकर 12:22 बजे तक चलेगा, यानी करीब 1 घंटा 21 मिनट तक। इस ग्रहण का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह पितृ पक्ष की शुरुआत के ठीक आसपास पड़ रहा है, जिससे धार्मिक मान्यताओं में इसका महत्व बढ़ जाता है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

चंद्रग्रहण की समय-सारणी (IST में)

चंद्रग्रहण की शुरुआत पेनुम्ब्रल फेज से शाम 8:59 बजे होगी। इसके बाद उम्ब्रल फेज की शुरुआत: रात 9:58 बजे, पूर्ण ग्रहण की शुरुआत रात 11:01 बजे, अधिकतम ग्रहण: रात 11:42 बजे, पूर्ण ग्रहण का अंत सुबह 12:22 बजे (8 सितंबर), उम्ब्रल फेज का अंत सुबह 1:25 बजे, पेनुम्ब्रल फेज का अंत सुबह 2:24 बजे ग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 25 मिनट की होगी, लेकिन उम्ब्रल फेज 3 घंटे 28 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण भारत के सभी प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, पुणे, लखनऊ, बेंगलुरु और चंडीगढ़ में साफ दिखाई देगा। दुनिया के अन्य हिस्सों में यह यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी प्रभाव होगा।

सूतक काल: कब शुरू होगा और क्या हैं नियम?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण के दौरान सूतक काल लागू होता है, जो ग्रहण की शुरुआत से लगभग 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। इस ग्रहण के लिए सूतक काल दोपहर करीब 12:56 बजे से शुरू होगा और ग्रहण समाप्त होने तक चलेगा। सूतक काल में पूजा-पाठ, खाना पकाना, भोजन ग्रहण करना और किसी भी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, जैसे घर से बाहर न निकलना और ग्रहण न देखना।

पितृ पक्ष और श्राद्ध से जुड़ा महत्व

यह चंद्रग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा पर पड़ रहा है, जो पितृ पक्ष की शुरुआत का संकेत देता है। पितृ पक्ष 2025 में 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक चलेगा, जिसमें सरवा पितृ अमावस्या (महालय अमावस्या) पर समाप्त होगा।

चन्द्रग्रहण पितृ पक्ष के आरंभ से ठीक पहले या उसके साथ ही पड़ रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। सूतक काल के कारण पितृ पक्ष के पहले दिन श्राद्ध करना उचित नहीं माना जाता। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, श्राद्ध कर्म सूतक काल से पहले यानी दोपहर 12:56 बजे से पहले पूर्ण कर लेना चाहिए। यदि सूतक शुरू होने के बाद श्राद्ध किया जाए, तो वह फलदायी नहीं माना जाता। पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और दान किया जाता है, लेकिन ग्रहण के प्रभाव से बचने के लिए सभी नियमों का पालन जरूरी है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सावधानियां

वैज्ञानिक रूप से, चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है, इससे कोई स्वास्थ्य जोखिम नहीं है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण नंगी आंखों से न देखें। लाइव स्ट्रीमिंग या टेलीस्कोप का उपयोग करें। यह ग्रहण दशक के सबसे लंबे पूर्ण चंद्रग्रहणों में से एक है।

Share via
Share via