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अमेरिका की 500% टैरिफ की धमकी: भारत-चीन के अमेरिकी निर्यात पर भारी बोझ, रूसी तेल खरीद पर सख्ती

नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और अन्य उत्पाद खरीदने वाले देशों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। एक प्रस्तावित विधेयक के तहत भारत और चीन जैसे देशों के अमेरिका में निर्यात पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इसका मतलब है कि भारत और चीन को अपने अमेरिकी निर्यात पर पांच गुना अधिक कर चुकाना पड़ सकता है, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा।

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वर्तमान में भारत पर अमेरिकी आयात शुल्क पहले से ही 50 प्रतिशत है, जिसमें रूसी तेल खरीद के लिए अतिरिक्त 25 प्रतिशत जुर्माना शामिल है। ट्रंप ने हाल ही में कहा कि यदि भारत रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद नहीं करता, तो टैरिफ और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा, “मोदी एक अच्छे व्यक्ति हैं, वे मुझे खुश करना चाहते हैं और जानते हैं कि मैं क्यों नाराज हूं।” फिर भी, उन्होंने चेतावनी दी कि “हम भारत पर टैरिफ बहुत जल्दी बढ़ा सकते हैं।

“क्यों लग रही है यह सजा?

अमेरिका का आरोप है कि भारत और चीन रूस से सस्ता तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को फंडिंग दे रहे हैं। भारत रूस से अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है, जबकि चीन सबसे बड़ा खरीदार है।।प्रस्तावित ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025’ विधेयक ट्रंप का समर्थन प्राप्त है, जो रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ की अनुमति देता है। हालांकि यह विधेयक अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन ट्रंप इसे लीवरेज के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत पर मौजूदा प्रभाव:

2025 में लगाए गए 50% टैरिफ से भारतीय निर्यात प्रभावित हुआ है, लेकिन नवंबर में अमेरिका को निर्यात 22% बढ़कर 7 अरब डॉलर हुआ। कुछ सेक्टर जैसे टेक्सटाइल, ज्वेलरी, सी फूड में नुकसान हुआ, लेकिन भारत ने यूरोपीय संघ और चीन जैसे नए बाजारों में निर्यात बढ़ाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आगे टैरिफ बढ़ने से निर्यात में गिरावट तेज हो सकती है, लेकिन भारत विविधीकरण की रणनीति अपनाकर मुकाबला कर रहा है।

चीन की स्थिति:

चीन पर टैरिफ कम हैं क्योंकि अमेरिका के साथ ट्रेड ट्रूस है, लेकिन रूसी तेल खरीद पर दबाव बढ़ रहा है। ट्रंप ने यूरोपीय संघ से भी भारत-चीन पर 100% टैरिफ लगाने की अपील की है।

भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी महंगा पड़ेगा और भारत को रूस-चीन के साथ संबंध मजबूत करने पर मजबूर कर सकता है। व्यापार वार्ताएं जारी हैं, लेकिन 500% टैरिफ की धमकी दोनों देशों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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