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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की त्रासदी: राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, सरकार पर साधा निशाना

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की त्रासदी: राहुल गांधी ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, सरकार पर साधा निशाना

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डेस्क 17 जनवरी : मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद पीड़ित परिवार से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने  परिवारों तथा बीमार मरीजों से मुलाकात की और एक लाख रुपये की सहायता राशि दी ।

इस घटना में दर्जनों मौते हुई थी और इसने पूरे देश को झकझोर दिया था। दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुई इस त्रासदी में उल्टी-दस्त (डायरिया) की बीमारी फैली, जिसके कारण कई परिवारों ने अपनों को खो दिया।

आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस क्षेत्र का दौरा किया और पीड़ित परिवारों तथा बीमार मरीजों से मुलाकात की।

त्रासदी का दर्द और आंकड़े

भागीरथपुरा में पुरानी पाइपलाइनों में लीकेज के कारण सीवेज पानी पीने के पानी में मिल गया, जिसमें फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और E. coli जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए। स्थानीय निवासियों और कांग्रेस के दावों के अनुसार 23-24 लोगों की मौत हुई है, जबकि सरकारी ‘डेथ ऑडिट’ रिपोर्ट में 15 मौतों को दूषित पानी से जुड़ा माना गया है।

हजारों लोग प्रभावित हुए, जिनमें से सैकड़ों अस्पताल में भर्ती रहे। कई मरीज अभी भी गंभीर हालत में हैं।
इलाके में पानी की सप्लाई टैंकरों से हो रही है, लेकिन स्थायी समाधान की कमी बनी हुई है।

यह घटना तब हुई जब इंदौर को लगातार स्वच्छ सर्वेक्षण में देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया जाता रहा है और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत भारी निवेश हुआ है।

राहुल गांधी ने बॉम्बे अस्पताल में भर्ती मरीजों से भी मुलाकात की और 22 प्रभावित परिवारों को 1 लाख रुपये की सहायता राशि के चेक सौंपे।

राहुल गांधी का बयान

भागीरथपुरा पहुंचकर राहुल गांधी ने कहा,
“ये कैसी स्मार्ट सिटी है जहां पीने का पानी नहीं है और लोगों को डराया जा रहा है? आज भी यहां साफ पानी नहीं मिल रहा है। सरकार की लापरवाही से इतनी मौतें हुईं, पीड़ितों को उचित मुआवजा और न्याय मिलना चाहिए। साफ पानी हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन सरकार इसमें पूरी तरह नाकाम रही है।”

घटना

स्थानीय निवासियों ने कई महीनों से पानी की बदबू और रंग की शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मौतों में 5-6 महीने के शिशु भी शामिल हैं, जिन्हें बोतल से दूध पिलाने के लिए दूषित पानी इस्तेमाल किया गया।
सरकार ने कुछ अधिकारियों को निलंबित किया है और स्वच्छ जल अभियान शुरू किया है, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि अब तक पर्याप्त मुआवजा और स्थायी समाधान नहीं मिला।

 

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