धर्म की आड़ में शोषण ! दरभंगा में चर्चित कथावाचक श्रवण दास जी महाराज गिरफ्तार

धर्म की आड़ में शोषण ! दरभंगा में चर्चित कथावाचक श्रवण दास जी महाराज गिरफ्तार

धर्म की आड़ में शोषण ! दरभंगा में चर्चित कथावाचक श्रवण दास जी महाराज गिरफ्तार

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धर्म की आड़ में शोषण ! दरभंगा में चर्चित कथावाचक श्रवण दास जी महाराज गिरफ्तार

शादी का झांसा देकर एक साल तक यौन शोषण और जबरन गर्भपात का गंभीर आरोप

दरभंगा, 17 जनवरी 2026: बिहार के दरभंगा जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें मिथिलांचल क्षेत्र के प्रसिद्ध कथावाचक श्रवण दास जी महाराज (उर्फ श्रवण ठाकुर) को महिला थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर एक महिला के साथ शादी का प्रलोभन देकर लगभग एक वर्ष तक यौन शोषण करने और गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात कराने का संगीन आरोप लगा है।

यह मामला आस्था के नाम पर हो रहे कथित शोषण का एक गंभीर उदाहरण बनकर उभरा है, जिसने लोगो को मानसिक रूप से झकझोर दिया है

आरोपों का विवरण

पीड़िता की शिकायत के अनुसार, श्रवण दास जी महाराज ने शादी का भरोसा देकर महिला के साथ लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए। जब महिला गर्भवती हुई, तो आरोपी ने गर्भपात कराने के लिए दबाव बनाया और बाद में शादी से मुकर गए।इस मामले में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर कथित शादी का वीडियो वायरल हो गया, जिसमें बंद कमरे में सिंदूर लगाने जैसे दृश्य दिखाए गए थे। वीडियो वायरल होने के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैला,

हालांकि आरोपी कथावाचक ने इसे बाद में फर्जी करार दिया।

पुलिस कार्रवाई

महिला थाना में 19 दिसंबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने गहन जांच की। पर्याप्त साक्ष्य और वायरल वीडियो मिलने पर आज (17 जनवरी 2026) त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया चल रही है और आगे की जांच जारी है।

समाज पर प्रभाव

चुकी कथावाचक को लोग आस्था के नजर से देखते है पूजते है अगर यह घटना सही निकली तो न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और धार्मिक स्तर पर ऐसे फर्जी कथावाचक पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लोग पूछ रहे हैं कि आस्था के नाम पर ऐसे कृत्य कैसे हो रहे हैं? पीड़िता के परिवार ने न्याय की मांग की है और जांच में पारदर्शिता की अपील की है।

नोट: यह मामला अभी जांच के दौर में है। भारतीय कानून के अनुसार, आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक अदालत द्वारा दोषसिद्ध न कर दिया जाए।

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