Kasturba Vidyalaya in Kerasai remains unopened even after seven years; students' future affected by the incomplete building.

सात साल बाद भी नहीं खुला केरसई का कस्तूरबा विद्यालय, अधूरे भवन से छात्राओं का भविष्य प्रभावित

Kasturba Vidyalaya in Kerasai remains unopened even after seven years; students' future affected by the incomplete building.
Kasturba Vidyalaya in Kerasai remains unopened even after seven years; students’ future affected by the incomplete building.

शंभू कुमार सिंह 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

सिमडेगा: जिले के केरसई प्रखंड के बाघडेगा में वर्ष 2019 से निर्माणाधीन कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय सात साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है। भवन निर्माण अधूरा होने के कारण छात्राओं को अब तक विद्यालय की सुविधा नहीं मिल पाई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी वर्ष 2024 से मुख्य द्वार पर ताला लगाकर फरार है, जिससे निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है।

Deoghar
Advertisement

ग्रामीणों के अनुसार, सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य दूर-दराज़ और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बालिकाओं को निःशुल्क आवासीय एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था। लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण केरसई प्रखंड की छात्राएं इस सुविधा से वंचित हैं।

Drishti 04
Advertisement
Drishti 03
Advertisement

विद्यालय शुरू नहीं होने के कारण केरसई की छात्राओं को कुरडेग प्रखंड स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में नामांकन कराना पड़ रहा है। वहां तक पहुंचने के लिए पर्याप्त परिवहन सुविधा नहीं होने से छुट्टियों के दौरान छात्राओं और उनके अभिभावकों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इससे उन पर आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

Drishti 02
Advertisement
Drishti 01
Advertisement

स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से अधूरे निर्माण कार्य को जल्द पूरा कर विद्यालय का संचालन शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मुद्दे को लेकर जन आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।

Kashmir
advertisement
RKDF
advertisement
नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now