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कहाँ है कैरव गांधी ?  अपहरण हुए नौ दिन हो गए : बिहार तक पहुंची जांच, स्कॉर्पियो मालिक फरार

कहाँ है कैरव गांधी ?  अपहरण हुए नौ दिन हो गए : बिहार तक पहुंची जांच, स्कॉर्पियो मालिक फरार
नौवें दिन भी नहीं मिला कोई सुराग, पुलिस की कार्रवाई असफल

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कैरव गांधी की एक महिला मित्र से भी पूछताछ

बिष्टुपुर स्थित एसएसपी आवास के समीप से  उद्योगपति कैरव गांधी के अपहरण मामले में पुलिस की जांच अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। घटना को नौ दिन बीत जाने के बावजूद न तो अपहृत कैरव गांधी का पता चल पाया है और न ही अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी हो सकी है।

जांच के दौरान पुलिस को यह जानकारी मिली है कि अपहरण में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो गाड़ी बिहार के नालंदा जिले के राजगीर थाना क्षेत्र अंतर्गत नई पोखर इलाके के निवासी राजशेखर के नाम पर दर्ज है। वाहन मालिक तक पहुंचने के लिए पुलिस की टीम नालंदा पहुंची, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी फरार हो चुका था।

पुलिस ने नालंदा पुलिस के सहयोग से राजशेखर के घर पर कई बार छापेमारी की, लेकिन हर बार उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। बताया जा रहा है कि आरोपी अपनी स्कॉर्पियो के साथ फरार हो गया, जो पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
इधर, मामले की जांच के क्रम में सोनारी थाना क्षेत्र में कैरव गांधी की एक महिला मित्र से भी पूछताछ की गई, हालांकि वहां से भी कोई निर्णायक जानकारी पुलिस को नहीं मिल सकी।
13 जनवरी को सर्किट हाउस इलाके से हुए इस सनसनीखेज अपहरण ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोल्हान के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा द्वारा लगातार जल्द खुलासे के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन 192 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस खाली हाथ नजर आ रही है।
कैरव गांधी के घर के बाहर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी रही,
आरोपी का आपराधिक प्रोफाइल
राजशेखर के पिता का नाम उपेंद्र सिंह है, जो राजगीर में ‘मारवाड़ी बासा’ नामक होटल का संचालन करते हैं। इससे पहले राजशेखर नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड में एक कंप्यूटर कोचिंग सेंटर चलाता था, जिसे विवादों के चलते बंद कर दिया गया था। नई पोखर इलाका पहले से ही साइबर अपराधियों का गढ़ माना जाता है।
हाई अलर्ट और लगातार छापेमारी के बावजूद आरोपी का फरार हो जाना पुलिस के लिए गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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