पाकिस्तान ने 2023 की बाढ़ में बहकर सीमा पार गए 7 भारतीय नागरिकों को रिहा किया , बताई अपनी आपबीती
पाकिस्तान ने 2023 की बाढ़ में बहकर सीमा पार गए 7 भारतीय नागरिकों को रिहा किया , बताई अपनी आपबीती

पंजाब में 1 फरवरी को एक भावुक और राहत भरी घटना हुई, जब पाकिस्तान ने अटारी-वाघा बॉर्डर पर 7 भारतीय नागरिकों को भारत को सौंप दिया। ये सभी लोग जुलाई 2023 में पंजाब में आई भीषण बाढ़ के दौरान सतलुज नदी के तेज बहाव में बह गए थे।
वे अपने मवेशियों और खेती के सामान को बचाने की कोशिश में अनजाने में पाकिस्तानी क्षेत्र में पहुंच गए थे, जहां पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और सीमा पार करने के आरोप में जेल में डाल दिया।
घटना का पूरा विवरण
कब हुई बाढ़? जुलाई 2023 में पंजाब (खासकर फिरोजपुर, फाजिल्का और आसपास के सीमावर्ती इलाकों) में मानसून की भारी बारिश से सतलुज नदी उफान पर थी। कई पुल टूट गए, बांधों का पानी छोड़ा गया, और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का कहर बरपा।
कैसे बह गए?
ये लोग अपने जानवरों (गाय, भैंस आदि) को बचाने के लिए पानी में उतरे या नाव/ट्रैक्टर से मदद करने गए, लेकिन तेज बहाव ने उन्हें पाकिस्तान की तरफ बहा दिया। पाकिस्तानी पक्ष ने उन्हें “अवैध घुसपैठ” मानकर गिरफ्तार किया।
कितने समय तक जेल में रहे?
लगभग ढाई साल (2.5 वर्ष) तक। इनमें से कुछ ने अपनी सजा पूरी कर ली थी, जबकि कुछ मामलों में लाहौर कोर्ट ने रिहाई का आदेश दिया था।
रिहाई की प्रक्रिया:
दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत और MEA (विदेश मंत्रालय) के प्रयासों से रिहाई संभव हुई। पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें बीएसएफ को सौंपा। अटारी बॉर्डर के प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण महल ने पुष्टि की कि रिहाई का आदेश दोनों पक्षों को मिला था।
रिहा हुए भारतीयों के नाम और पृष्ठभूमि
रिहा हुए 7 लोगों के नाम
:हरविंदर सिंह (जालंधर, मेघटपुर क्षेत्र)
चंदर सिंह
विशाल
सुनील
गुरमीत सिंह
जोगिंदर सिंह
रतनपाल सिंह (लुधियाना, सिधवान बेट क्षेत्र)
इनमें से 4 फिरोजपुर जिले के, 1 जालंधर, 1 लुधियाना, और 1 उत्तर प्रदेश का निवासी है।
जेल में कटे दिनों की आपबीती (रिहा लोगों और परिवारों के बयान)
भारत लौटने के बाद कई लोगों ने अपनी कड़वी यादें साझा कीं:
जेल की स्थिति बहुत खराब बताई गई—भीड़भाड़, सीमित साफ पानी, खराब खाना, और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी।
मानसिक प्रताड़ना और अकेलेपन का सामना करना पड़ा। कई ने बताया कि वे रोज घर और परिवार की याद में रोते थे।
सबसे दर्दनाक हिस्सा: घर लौटकर पता चला कि परिवार के सदस्य बीमार पड़ गए या गुजर गए।
रतनपाल सिंह (26 वर्ष) ने बताया कि जेल में रहते हुए उनके पालक माता-पिता (चाचा-चाची) और भाई वेद प्रकाश की मौत हो गई।
हरविंदर सिंह (25 वर्ष) को पता चला कि उनके पिता की मौत पिछले साल हो चुकी थी।
वे अन्य भारतीय कैदियों (खासकर मछुआरों) की जल्द रिहाई की मांग कर रहे हैं, जो अभी भी पाकिस्तानी जेलों में हैं।
भारत-पाकिस्तान के बीच कैदियों की अदला-बदली का संदर्भयह रिहाई दोनों देशों के बीच समय-समय पर होने वाली कैदियों/मछुआरों की अदला-बदली का हिस्सा है।
उदाहरण:सितंबर 2025 में भारत ने 48 पाकिस्तानी मछुआरों और 19 नागरिक कैदियों को रिहा किया था।
दोनों देश अक्सर ऐसे “अनजाने” सीमा पार करने वालों को रिहा करते हैं, लेकिन राजनीतिक तनाव के कारण प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है।


















