रांची देशव्यापी आम हड़ताल की पूर्व संध्या पर विशाल मशाल जुलूस: मजदूरों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ दिखाई एकजुटता
रांची : 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी आम हड़ताल (भारत बंद) की पूर्व संध्या पर संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच, राँची (झारखंड) के आह्वान पर शहर में एक विशाल और जुझारू मशाल जुलूस निकाला गया। यह जुलूस विभिन्न श्रमिक संगठनों, कर्मचारियों, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, स्कीम वर्करों, किसानों, खेत मजदूरों और लोकतांत्रिक ताकतों की व्यापक भागीदारी के साथ निकला और फिरायालाल चौक पर एक बड़ी सभा में तब्दील हो गया।
जुलूस के दौरान हजारों मजदूरों ने केंद्र सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों, चार लेबर कोड और अन्य जनविरोधी कानूनों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। वक्ताओं ने चार लेबर कोड को “मजदूरों को गुलाम बनाने वाला दस्तावेज” करार देते हुए कहा कि इनके माध्यम से।काम के घंटे 12 तक बढ़ाने का रास्ता खोला गया है, हड़ताल के अधिकार पर पाबंदी लगाई जा रही है, पक्की नौकरी की व्यवस्था समाप्त की जा रही है, ठेका, अस्थायी और फिक्स टर्म रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है, यूनियन बनाने और मान्यता प्राप्त करने में बाधाएँ खड़ी की जा रही हैं, सामाजिक सुरक्षा कमजोर की जा रही है — ईएसआई और पीएफ की कोई ठोस गारंटी नहीं, छंटनी और तालाबंदी को आसान बनाया जा रहा है और न्यूनतम वेतन, बोनस और ग्रेच्युटी पर हमला किया जा रहा है।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि इन कोडों के लागू होने से लगभग 70% फैक्ट्री मजदूर और 90% असंगठित मजदूर प्रभावी श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग रखी कि लेबर कोड रद्द करो और पुराने श्रम कानून बहाल करो। अमेरिकी दबाव में बनाए गए जनविरोधी विधेयकों/अधिनियमों को तत्काल वापस लो, जिनमें VB-G RAM G अधिनियम 2025 (ग्रामीण रोजगार गारंटी से संबंधित), SHANTI अधिनियम 2025 (परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी भागीदारी से जुड़ा), बिजली संशोधन विधेयक 2025, सामाजिक सुरक्षा सबका बीमा विधेयक 2025, बीज विधेयक 2025, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025।
मजदूर संगठनों ने सम्मानजनक रोजगार, न्यूनतम मजदूरी की गारंटी, संगठित होने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा एवं पेंशन, तथा सभी के लिए खाद्य, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास।की गारंटी की मांग दोहराई।
संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच ने सभी मजदूरों, कर्मचारियों, किसानों, युवाओं और आम जनता से अपील की है कि वे 12 फरवरी की देशव्यापी आम हड़ताल को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाएं और मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी एकजुट ताकत का प्रदर्शन करें।


















