20260213 212300

केतुंगा धाम: त्रेता युग से विराजमान भोलेनाथ का प्राचीन धाम, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम संगम

शंभू कुमार सिंह 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

सिमडेगा : बानो प्रखंड के केतुंगा गांव में देवनदी और मल्लेश्वरी (मालगो) नदी के पवित्र संगम तट पर बसा केतुंगा धाम झारखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक है। लोकमान्यता के अनुसार यहां का जिवंत शिवलिंग त्रेता युग से स्थापित है, जिसकी वजह से यह धाम भक्तों के लिए अत्यंत श्रद्धेय और चमत्कारी माना जाता है।

यह स्थान न केवल शिव भक्ति का केंद्र है, बल्कि ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। पुरातत्व खोजों में यहां अशोक कालीन बौद्ध प्रतिमाएं और विहार के अवशेष मिले हैं, जो सम्राट अशोक के कलिंग युद्ध के बाद इस क्षेत्र में विश्राम से जुड़े माने जाते हैं।

पौराणिक कथा और महत्व

लोककथाओं के अनुसार, यह क्षेत्र राजा श्वेतकेतु, केतुश्रृंग और केतुमान के शासनकाल में था, जो परम शिवभक्त थे। रानी सत्यवती की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और सपरिवार निवास करने का वरदान दिया। बाद में एक किरात परिवार की कपिला गाय के दूध की स्वतः धारा बहने से शिवलिंग का दिव्य प्रकटीकरण हुआ। तभी से यह स्थान गोरक्षनाथ बूढ़ा महादेव के नाम से भी प्रसिद्ध है।

मंदिर परिसर में शिवलिंग के साथ माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, नंदी, भैरव, जलेश्वर-जलेश्वरी, टांगीनाथ कुंड, राम चरण चिन्ह, श्वेत मुनि आश्रम और अशोक कालीन बुद्ध प्रतिमा जैसे कई धार्मिक प्रतीक मौजूद हैं, जिससे पूरा क्षेत्र देवस्थली के रूप में जाना जाता है।

श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं और मेलों का उल्लास

यहां कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर, विवाहित जोड़े संतान सुख और अन्य भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं। झारखंड के अलावा ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष दर्शन के लिए पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि पर भव्य मेला, अखंड यज्ञ और शिव बारात निकलती है। श्रावणी मेला, रामनवमी और मकर संक्रांति पर विशेष उत्सव मनाए जाते हैं। सावन के सोमवार को तड़के जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगती हैं और “बोल बम” के जयकारों से वातावरण गूंज उठता है।

प्राकृतिक सौंदर्य और विकास

देवनदी-मल्लेश्वरी के संगम का मनोरम दृश्य, हरी-भरी वादियां और शांत आध्यात्मिक वातावरण केतुंगा धाम को पर्यटन स्थल के रूप में भी लोकप्रिय बनाता है। पर्यटन स्थल घोषित होने के बाद जिला प्रशासन द्वारा सड़क, शौचालय, गेट और अन्य आधारभूत सुविधाओं का चरणबद्ध विकास किया जा रहा है।

Share via
Share via