चैती छठ महापर्व की धूम: उपायुक्त कंचन सिंह सहित हजारों श्रद्धालु करेंगे अनुष्ठान, आज से शुरू हुआ नहाय-खाय
सिमडेगा : लोक आस्था का सबसे बड़ा महापर्व चैती छठ आज से जोर-शोर से शुरू हो गया है। यह चार दिवसीय कठिन व्रत सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है, जिसमें व्रती कठोर नियमों का पालन करते हुए प्रकृति की आराधना करते हैं। हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के बीच पड़ने वाला यह पर्व संतान की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि तथा आरोग्य के लिए मनाया जाता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उपायुक्त कंचन सिंह ने आज स्वयं इस व्रत का अनुष्ठान शुरू किया। उन्होंने गेहूं सुखाकर और सात्विक भोजन तैयार कर नहाय-खाय की परंपरा का पालन किया। जिले भर के हजारों श्रद्धालु भी इस महापर्व में शामिल हो रहे हैं।
चैती छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती नदी, तालाब या पवित्र जल स्रोत में स्नान कर शुद्धि प्राप्त करते हैं। इसके बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है, जिसमें मुख्य रूप से कद्दू, चना दाल और अरवा चावल का भात शामिल होता है। यह दिन शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक है।
कल यानी 23 मार्च को खरना पूजा होगी। व्रती पूरे दिन निराहार रहेंगे और शाम को पूजा के बाद गुड़-दूध से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा, जो छठ व्रत की सबसे चुनौतीपूर्ण साधना मानी जाती है।
24 मार्च (तीसरा दिन) को व्रती डूबते सूर्य (अस्ताचलगामी) को अर्घ्य देंगे। सिमडेगा में केलाघाघ सूर्य मंदिर सरोवर तट सहित विभिन्न नदियों और तालाबों के किनारे विधि-विधान से पूजा होगी। वहीं 25 मार्च (चौथा दिन) को उगते सूर्य (उदयीमान भुवन भास्कर) को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण होगा और महापर्व का समापन होगा।
चैती छठ आस्था, शुद्धता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। जिले में घाटों की साफ-सफाई और तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उपायुक्त के नेतृत्व में प्रशासनिक स्तर पर भी श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित की जा रही है।

















