झारखंड में सर्पदंश अधिसूचित रोग घोषित, हर मामले की रिपोर्टिंग अनिवार्य
रांची : झारखंड सरकार ने सर्पदंश से होने वाली बढ़ती मौतों पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने सर्पदंश को राज्य में अधिसूचित रोग घोषित कर दिया है। इसके साथ ही अब हर सर्पदंश मामले और उससे होने वाली मृत्यु की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों—जिसमें मेडिकल कॉलेज, कॉर्पोरेट अस्पताल, रेलवे, आर्मी और आयुष संस्थान शामिल हैं—को सर्पदंश के हर केस की जानकारी देनी होगी। रिपोर्टिंग नहीं करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
सरकार का यह फैसला देश में सर्पदंश से होने वाली ऊंची मृत्यु दर को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 3 से 4 मिलियन सर्पदंश के मामले सामने आते हैं, जिनमें लगभग 58 हजार लोगों की मौत हो जाती है। झारखंड में मानसून और उमस भरे मौसम के दौरान ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जाती है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी संस्थानों को सर्पदंश से जुड़े आंकड़े आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल पर दर्ज करने होंगे। साथ ही प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में अलग पंजी संधारित करना होगा और हर महीने की 5 और 20 तारीख तक रिपोर्ट सिविल सर्जन को भेजनी होगी। इसके बाद जिला स्तर से समेकित रिपोर्ट हर महीने की 10 तारीख तक विभाग को भेजी जाएगी।
राज्य में पहले से ही ‘स्नेक बाइट प्रिवेंशन एंड कंट्रोल प्रोग्राम’ संचालित है, जिसके तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा झाड़-फूंक जैसी कुरीतियों को रोकने और लोगों को आधुनिक इलाज के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने निर्देश दिया है कि नेशनल स्नेकबाइट मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि सटीक डेटा के आधार पर ही प्रभावी नीति बनाई जा सकेगी, जिससे भविष्य में सर्पदंश से होने वाली मौतों और विकलांगता को कम किया जा सके।

















