गुड न्यूज : खलारी के सुड़ी समाज ने मृत्यु भोज की कुप्रथा को किया समाप्त, गरीब परिवारों को कर्ज से बचाने की पहल

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गुड न्यूज : खलारी के सुड़ी समाज ने मृत्यु भोज की कुप्रथा को किया समाप्त, गरीब परिवारों को कर्ज से बचाने की पहल

गुड न्यूज : खलारी के सुड़ी समाज ने मृत्यु भोज की कुप्रथा को किया समाप्त, गरीब परिवारों को कर्ज से बचाने की पहल

संजय ओझा /खलारी

खलारी/मैकलुस्कीगंज: समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ अक्सर आवाजें उठती हैं, लेकिन उसे अमली जामा पहनाने की हिम्मत कम ही लोग दिखा पाते हैं। इसी कड़ी में खलारी के मैकलुस्कीगंज क्षेत्र के हेसालोंग सुड़ी समाज ने एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए मृत्यु भोज की परंपरा को पूरी तरह से समाप्त करने का निर्णय लिया है।

दामोदर नदी तट पर हुई ऐतिहासिक बैठक

शुक्रवार, 28 मार्च को दामोदर नदी के तट पर समाज के प्रबुद्ध जनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कुलदीप साहु की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में समाज के सैकड़ों सदस्य शामिल हुए। चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु समाज में बढ़ रही मृत्यु भोज की विसंगतियां थीं।
गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बन रहा था ‘भोज’
बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मृत्यु भोज की परंपरा अब समाज के लिए एक अभिशाप बनती जा रही है। सक्षम परिवार तो इसे आसानी से निभा लेते हैं, लेकिन मध्यम और गरीब परिवारों के लिए यह एक भारी आर्थिक बोझ है। कई बार परिवार को इस सामाजिक दबाव के कारण कर्ज के जाल में फंसना पड़ता है, जिससे उबरने में वर्षों लग जाते हैं।

सर्वसम्मति से लिए गए 3 मुख्य निर्णय:

मृत्यु भोज से मुक्ति: अब मृत्यु के बारहवें दिन होने वाले बड़े भोज से पीड़ित परिवार को पूरी तरह मुक्त रखा जाएगा। समाज के लोग उस दिन परिवार के घर जाकर केवल दुख साझा करेंगे और वहां उपलब्ध साधारण प्रसाद ग्रहण कर लौट आएंगे।
बुलाहट की औपचारिकता खत्म: अंतिम संस्कार या शोक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अब किसी औपचारिक बुलावे (न्योता) की प्रतीक्षा नहीं की जाएगी। समाज के लोगों को जैसे भी सूचना मिलेगी, वे तत्काल अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
धार्मिक परंपराएं रहेंगी जारी: समाज ने स्पष्ट किया कि दसकर्मा और पंडित से जुड़े आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान पहले की तरह श्रद्धापूर्वक जारी रहेंगे, केवल आडंबर और दिखावे वाले भोज पर रोक लगाई गई है।

इस ऐतिहासिक निर्णय के दौरान सोनू साहु, संदीप कुमार, गोपाल साहु, जितेंद्र भारतीय, बसंत कुमार, पंकज, सुमित कुमार, मदन साहु, ठाकुर साहु सहित सुड़ी समाज के सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित थे। समाज के इस फैसले की हर तरफ सराहना हो रही है।

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