केंद्र सरकार ने आईटी नियम 2021 में दूसरा संशोधन ड्राफ्ट जारी किया: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और आम यूजर्स पर बढ़ेगी जवाबदेही

केंद्र सरकार ने आईटी नियम 2021 में दूसरा संशोधन ड्राफ्ट जारी किया: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और आम यूजर्स पर बढ़ेगी जवाबदेही

केंद्र सरकार ने आईटी नियम 2021 में दूसरा संशोधन ड्राफ्ट जारी किया: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और आम यूजर्स पर बढ़ेगी जवाबदेही

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केंद्र सरकार ने आईटी नियम 2021 में दूसरा संशोधन ड्राफ्ट जारी किया: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और आम यूजर्स पर बढ़ेगी जवाबदेही

दृष्टि नाउ डेस्क – केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 30 मार्च 2026 को Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital

Media Ethics Code) Rules, 2021 में Second Amendment Rules, 2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। यह प्रस्तावित संशोधन लागू होने पर सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही काफी बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर आम यूजर्स पर भी पड़ेगा।मुख्य बदलाव क्या हैं?सेफ हार्बर सुरक्षा पर सशर्त बाध्यता
अब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स खुद को इंटरमीडियरी बताकर यूजर्स के कंटेंट की जिम्मेदारी से बच जाते थे (आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत सेफ हार्बर)।

नए ड्राफ्ट में प्रावधान है कि यदि प्लेटफॉर्म MeitY द्वारा जारी निर्देशों, गाइडलाइंस, एडवाइजरी, एसओपी या क्लैरिफिकेशंस का पालन नहीं करते, तो उनकी सेफ हार्बर सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
मतलब: कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आसान हो जाएगी और वे यूजर्स के कंटेंट के लिए भी जवाबदेह ठहराई जा सकेंगी।

कंटेंट मॉडरेशन और तुरंत कार्रवाई

प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक, गलत, भ्रामक या कानून-विरुद्ध कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई करनी होगी। “यह यूजर ने पोस्ट किया” वाला बचाव अब कमजोर पड़ जाएगा। कंपनियों को कंटेंट निगरानी और मॉडरेशन को और सख्त बनाना पड़ेगा।

डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड का विस्तार (सबसे बड़ा बदलाव)

पहले यह कोड मुख्य रूप से रजिस्टर्ड न्यूज पब्लिशर्स पर लागू होता था। अब प्रस्ताव है कि सोशल मीडिया पर न्यूज, करंट अफेयर्स या राजनीतिक टिप्पणियां पोस्ट करने वाले आम यूजर्स (इन्फ्लुएंसर्स, क्रिएटर्स आदि) भी Inter-Departmental Committee (IDC) के दायरे में आ जाएंगे।
इससे फेक न्यूज और भ्रामक जानकारी पर अंकुश लगाने का प्रयास है, लेकिन आलोचक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश मान रहे हैं।

सरकार का स्वतः संज्ञान

सरकार बिना किसी औपचारिक शिकायत के भी किसी कंटेंट को समीक्षा के लिए कमेटी के पास भेज सकती है। यानी कोई भी पोस्ट, वीडियो या डिजिटल सामग्री पर स्वतः जांच शुरू हो सकती है।

आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

न्यूज या राजनीतिक कंटेंट शेयर करने वाले यूजर्स को ज्यादा सतर्क रहना पड़ेगा।
प्लेटफॉर्म्स ज्यादा आक्रामक मॉडरेशन करेंगे, जिससे पोस्ट हटाए जाने या अकाउंट सस्पेंड होने के मामले बढ़ सकते हैं।
फ्री स्पीच और मिसइनफॉर्मेशन नियंत्रण के बीच संतुलन की बहस तेज होने की संभावना है।

नोट: यह अभी ड्राफ्ट है। इसे 14 अप्रैल 2026 तक पब्लिक कंसल्टेशन के लिए खुला रखा गया है। कोई भी व्यक्ति या संगठन सुझाव/आपत्तियां itrules.consultation@meity.gov.in (mailto:itrules.consultation@meity.gov.in) पर भेज सकता है।MeitY ने ड्राफ्ट और संशोधनों की विस्तृत जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई है।यह संशोधन फरवरी 2026 में नोटिफाई किए गए AI-जनरेटेड/डीपफेक कंटेंट (SGI) संबंधी नियमों से अलग है।

 

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