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कानपुर में बड़ा किडनी रैकेट बेनकाब: 60 से ज्यादा अवैध ट्रांसप्लांट, दो अस्पताल सील

कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाले एक बड़े किडनी रैकेट का पर्दाफाश किया है। मामले में अब तक 60 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ‘आरोही’ और ‘आहूजा’ अस्पतालों को सील कर दिया है, साथ ही संचालक डॉक्टरों समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

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पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के निर्देश पर यह बड़ी कार्रवाई की गई। जांच में खुलासा हुआ है कि यह संगठित गिरोह सोशल मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के जरिए डोनर और रिसीवर के बीच सौदेबाजी करता था। गिरोह जरूरतमंद लोगों को झांसे में लेकर मोटी रकम पर किडनी ट्रांसप्लांट का सौदा तय कराता था।

पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह ने बिहार के एक एमबीए छात्र को डोनर और मेरठ की एक महिला को रिसीवर के रूप में जोड़कर अवैध ट्रांसप्लांट कराया। इस पूरे नेटवर्क में कई राज्यों के लोग जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

इस रैकेट का एक अहम किरदार शिवम अग्रवाल है, जो महज आठवीं पास है और एम्बुलेंस चालक का काम करता था। वह खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों को अपने जाल में फंसाता था और उन्हें अवैध ट्रांसप्लांट के लिए तैयार करता था। पुलिस के अनुसार, ये सभी अवैध ऑपरेशन अस्पतालों में रात के समय गोपनीय तरीके से किए जाते थे। न तो कोई आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जाता था और न ही कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता था, जिससे पूरे मामले को लंबे समय तक छिपाया जा सका।

फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। आशंका है कि इस रैकेट से जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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