जमीन घोटाला: हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज पिटीशन पर ED की आंशिक बहस पूरी, शनिवार को फिर होगी सुनवाई

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रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े 8.86 एकड़ जमीन फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है। रांची स्थित पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत में सोरेन द्वारा दायर ‘डिस्चार्ज पिटीशन’ (आरोप मुक्त करने की याचिका) पर सुनवाई हुई। गुरुवार को हुई इस सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी ओर से आंशिक बहस पेश की।
शनिवार को आ सकता है फैसला
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए शनिवार की तिथि निर्धारित की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से बहस पहले ही पूरी की जा चुकी है। अब शनिवार को ईडी की शेष बहस पूरी होने की संभावना है, जिसके बाद कोर्ट अपना फैसला सुरक्षित रख सकता है या सुना सकता है। यह फैसला तय करेगा कि हेमंत सोरेन पर आरोप तय (Charge Frame) किए जाएंगे या उन्हें इस मामले से मुक्त कर दिया जाएगा।
क्या है हेमंत सोरेन का पक्ष?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर 2025 को अदालत में याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया था। उन्होंने गुहार लगाई थी कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई ठोस मामला नहीं बनता है, इसलिए उन्हें इस केस से ‘डिस्चार्ज’ यानी आरोप मुक्त कर दिया जाए।

मामले की पृष्ठभूमि: गिरफ्तारी से जमानत तक
यह पूरा मामला रांची के बरियातू स्थित 8.86 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और फर्जीवाड़े से जुड़ा है। इस केस में अब तक के मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं:
31 जनवरी 2024: ईडी ने घंटों की पूछताछ के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था।
जेल और इस्तीफा: गिरफ्तारी से पहले सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था।
28 जून 2024: झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत प्रदान की, जिसके बाद वे जेल से बाहर आए और पुनः मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

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