Bokaro : स्टील प्लांट की खाली जमीन पर रैयतों के साथ हल चलाएंगे चम्पाई सोरेन

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Bokaro : स्टील प्लांट की खाली जमीन पर रैयतों के साथ हल चलाएंगे चम्पाई सोरेन

बोकारो में गरजे पूर्व सीएम चम्पाई सोरेन, विस्थापितों की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाएंगे..चम्पाई सोरेन की खुली चुनौती, डेढ़ महीने में विस्थापितों की समस्याएं सुलझाओ, नहीं तो चलाएंगे हल

बोकारो। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने बोकारो स्टील प्लांट के विस्थापितों की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने की घोषणा की है। वे आज सेक्टर 11 में शहीद प्रेम प्रसाद महतो की प्रतिमा का अनावरण करने आए थे।

प्रतिमा का अनावरण करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य सरकार एवं कंपनी प्रबंधन पर विस्थापितों को धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 1960 के दशक में भूमि अधिग्रहण के साठ वर्षों बाद भी अगर यहां के विस्थापित आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने और जान देने को मजबूर हैं, तो यह शर्मनाक है।

पूर्व सीएम ने कहा कि पिछले वर्ष बोकारो स्टील प्लांट में नौकरी की मांग को लेकर विस्थापित अप्रेंटिस संघ के विरोध-प्रदर्शन के दौरान शहीद प्रेम प्रसाद महतो की मृत्यु हो गई थी। एक शिक्षित युवा, एक इंजीनियर की इस प्रकार हुई हत्या से एक विस्थापित परिवार का चिराग बुझा दिया गया।

अपने राजनैतिक जीवन के शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए चम्पाई सोरेन ने कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत ही टाटा स्टील एवं यूसीआईएल के खिलाफ सशक्त आंदोलन से हुई है, जिसके फलस्वरूप हजारों आदिवासी/ मूलवासी ठेकाकर्मियों को स्थायी नौकरी मिली।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन द्वारा विस्थापित परिवारों के करीब 1500 युवाओं को अप्रेंटिस के नाम पर ट्रेनिंग दी गई, लेकिन उन्हें नौकरी की जगह सर्टिफिकेट थमा दिया गया। यह सरासर धोखाधड़ी है। अगर उन्हें ट्रेनिंग लेनी होती, तो कई इंस्टीट्यूट हैं।

चम्पाई सोरेन ने कहा कि एक ओर यहां के विस्थापित परिवार जाति प्रमाण पत्र तक नहीं बनवा पा रहे हैं, अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके अस्तित्व को मिटाने की साजिश हो रही है, विकास के नाम पर ली गई जमीन पर शॉपिंग मॉल बन रहे हैं। यह अधिकार उन्हें किसने दिया?

पूर्व सीएम ने राज्य सरकार एवं कंपनी प्रबंधन को डेढ़ महीने की समय सीमा देते हुए कहा कि अगर इस दौरान अप्रेंटिसशिप कर चुके युवाओं को नौकरी तथा विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तो वे रैयतों के साथ बोकारो स्टील प्लांट की खाली पड़ी जमीन पर हल चलाएंगे।

उन्होंने बताया कि जब भूमि अधिग्रहण अधिनियम में 12 सालों तक अधिग्रहीत भूमि का उपयोग नहीं होने पर, उसे वापस लौटाने का प्रावधान है, तब 60 वर्षों से खाली पड़ी जमीन को वापस करने में क्या समस्या है? या तो राज्य सरकार और कंपनी प्रबंधन अपना वादा पूरा करे, या फिर विस्थापितों की जमीन छोड़ दे।

पिछले वर्ष रांची के नगड़ी में हुए आंदोलन को याद करते हुए पूर्व सीएम ने कहा कि वहां भी सरकार आदिवासी/ मूलवासी किसानों की उपजाऊ जमीन को जबरन तार के बाड़ लगा कर घेर रही थी, उन्होंने मुझे हाउस अरेस्ट भी किया, लेकिन जैसे ही लाखों लोग हल-बैल के साथ वहां पहुंचे, मामले का समाधान हो गया। बोकारो समेत राज्य की अन्य परियोजनाओं के विस्थापितों के मुद्दों का समाधान भी इसी प्रकार आंदोलन द्वारा होगा।

उनकी इस घोषणा के बाद विस्थापितों में उम्मीद की एक किरण जगी है, और वे नगड़ी आंदोलन की तर्ज पर, अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं।

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