जमशेदपुर: संताली भाषा और ओल चिकी लिपि को लेकर हुंकार, 8वीं बोर्ड रिजल्ट की जांच और राजभाषा के दर्जे की मांग
जमशेदपुर: संताली भाषा और ओल चिकी लिपि को लेकर हुंकार, 8वीं बोर्ड रिजल्ट की जांच और राजभाषा के दर्जे की मांग
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By Niraj Tiwari
जमशेदपुर : जमशेदपुर परिसदन में आज पूर्वी सिंहभूम की आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था एवं ओल चिकी हुल बैसी के संयुक्त तत्वाधान में एक महत्वपूर्ण संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान सामाजिक प्रतिनिधियों ने झारखंड सरकार के समक्ष संताली भाषा की उपेक्षा और छात्रों के भविष्य से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए।
JAC 8वीं बोर्ड रिजल्ट में ‘D’ ग्रेड पर नाराजगी
संवाददाता सम्मेलन में वक्ताओं ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा जारी आठवीं बोर्ड के परिणामों पर कड़ा ऐतराज जताया। आरोप है कि संताली भाषा के छात्र-छात्राओं को जानबूझकर D ग्रेड दिया गया है।l
प्रमुख मांग: इस विसंगति की उच्च स्तरीय जांच हो और उत्तर पुस्तिकाओं की फिर से भौतिक जांच कर रिजल्ट में सुधार किया जाए।
संताली को प्रथम राजभाषा बनाने की मांग
प्रतिनिधियों ने जोर देते हुए कहा कि संताली भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है, इसलिए झारखंड में इसे प्रथम राजभाषा का दर्जा मिलना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने निम्नलिखित मांगें रखीं:
शिक्षकों की बहाली: ओल चिकी लिपि के शिक्षकों के पद सृजित कर अविलंब नियुक्ति की जाए।
सत्र 2026-27 का रोडमैप: आगामी सत्र से संताली भाषा की पढ़ाई अनिवार्य रूप से ओल चिकी लिपि में शुरू हो और पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
अकादमी का गठन: राज्य में ‘संताली अकादमी काउंसिल’ का गठन जल्द से जल्द किया जाए।
सार्वजनिक स्थलों पर दिखे ओल चिकी लिपि
भाषा की दृश्यता बढ़ाने के लिए संगठन ने मांग की है कि प्रदेश के सभी:
बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और सरकारी कार्यालयों के नाम ओल चिकी लिपि में लिखे जाएं।
झारखंड लोक भवन के मुख्य द्वार पर ओल चिकी लिपि में नाम अंकित हो।
JTET परीक्षा: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा में संताली भाषा को ओल चिकी लिपि में लिखने की मान्यता मिले और परीक्षा की अधिसूचना तुरंत जारी हो।
हमारी भाषा हमारी पहचान है। सरकार को चाहिए कि वह संताली भाषा के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त करे और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे। प्रतिनिधिमंडल
ये रहे उपस्थित
इस प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से ओल चिकी लिपि के महासचिव दुर्गा चरण मुर्मू ,माझी बाबा , बिंदु सोरेन, और बाबूराम सोरेन सहित कई सामाजिक प्रबुद्धजन शामिल हुए और अपने विचार साझा किए।
















