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CM हेमंत सोरेन ने बांटे नियुक्ति पत्र, 299 पदाधिकारियों और पर्यवेक्षिकाओं से मिली महिला विकास को नई गति

हेमंत सोरेन ने बांटे नियुक्ति पत्र, 299 पदाधिकारियों और पर्यवेक्षिकाओं से मिली महिला विकास को नई गति

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By Navin Kumar

रांची:  झारखंड के विकास पथ पर एक नया अध्याय जोड़ते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में आयोजित एक भव्य समारोह में 299 नवनियुक्त महिला पदाधिकारियों और पर्यवेक्षिकाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत हुई इन नियुक्तियों को राज्य में स्वास्थ्य और कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक ‘गेम-चेंजर’ माना जा रहा है।

 लंबे अंतराल के बाद बड़ी नियुक्तियां: विभाग को मिली नई ऊर्जा
इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि राज्य में लंबे समय से बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और महिला पर्यवेक्षिकाओं के पदों पर रिक्तियां थीं। इन रिक्तियों के भरने से न केवल विभाग की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण स्तर पर संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
उन्होंने कहा, आज महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होकर न केवल अपने परिवार की रीढ़ बन रही हैं, बल्कि समाज और राज्य के विकास में भी निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। इन नियुक्तियों का मुख्य फोकस महिलाओं से जुड़े मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ हल करना है।

मिशन ‘कुपोषण मुक्त झारखंड’

मुख्यमंत्री ने कुपोषण को राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधा और एक सामाजिक ‘श्राप’ करार दिया। उन्होंने नवनियुक्त कर्मियों के सामने चुनौतियों को रखते हुए कहा:
सामूहिक प्रयास की आवश्यकता: कुपोषण को केवल सरकारी आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सामूहिक प्रयासों से समाप्त किया जा सकता है।
स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूकता:  झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है। यहाँ की महिलाओं में अपनी शारीरिक और स्वास्थ्य समस्याओं को साझा न करने की प्रवृत्ति देखी जाती है। नवनियुक्त कर्मियों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे महिलाओं का विश्वास जीतें और उनकी समस्याओं का निराकरण करें।

निरोगी समाज का निर्माण:  यदि कुपोषण को बचपन में ही नहीं रोका गया, तो यह भविष्य में एक गंभीर बौद्धिक और शारीरिक चुनौती बन जाती है।

दुर्गम क्षेत्रों में योजनाओं का विस्तार

हेमंत सोरेन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज भी राज्य के कई दुर्गम और सुदूर क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों को **’अंतिम पायदान’** के सिद्धांत की याद दिलाई:
1. सरकारी योजनाओं की पहुंच: सरकार की प्राथमिकता है कि लाभ उन लोगों तक पहुंचे जो विकास की कतार में सबसे पीछे खड़े हैं।
2. बाधाओं को पार करने की इच्छाशक्ति: मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि दुर्गम क्षेत्रों में काम करने के दौरान आने वाली हर बाधा में सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी।
3. सकारात्मक वातावरण: सरकार का लक्ष्य है कि सुदूर गांवों में रहने वाले गरीब, पिछड़े और जरूरतमंद लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाई जा सके।

 डिजिटल क्रांति और पारदर्शिता

प्रशासनिक सुधारों का जिक्र करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि अधिकारियों और जमीनी स्तर के कर्मियों के बीच बेहतर ‘कनेक्टिविटी’ अनिवार्य है।
*तकनीकी सशक्तिकरण: विभाग द्वारा प्रखंड और ग्रामीण स्तर की कर्मियों को  मोबाइल फोन और टैब प्रदान किए गए हैं। इसका उद्देश्य योजनाओं की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
नियमित मूल्यांकन: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विभाग आंगनबाड़ी सेविकाओं, सीडीपीओ और पर्यवेक्षिकाओं के कार्यों का समय-समय पर मूल्यांकन करे। जो कर्मी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे, उन्हें सरकार द्वारा प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाएगा।

 सरकार का अभिन्न अंग और भविष्य की उम्मीदें

मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उन्हें याद दिलाया कि आज से वे ‘सरकार’ का चेहरा हैं। उन्होंने अपील की कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ करें।

समारोह में प्रमुख उपस्थित लोग:

कार्यक्रम के दौरान मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह और निदेशक किरण कुमार पासी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने चयनित अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
प्रमुख आंकड़े:

बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO): 62
महिला पर्यवेक्षिका: 237
कुल नियुक्ति पत्र:  299

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