ऑपरेशन ट्रेजरी क्लीन: झारखंड में ‘वेतन घोटाले’ पर ED की इंट्री, खाकी के बड़े चेहरों की नींद उड़ी
रांची: झारखंड पुलिस महकमे में वेतन के नाम पर हुए करोड़ों के खेल ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रांची, हजारीबाग और बोकारो में हुई फर्जी निकासी के मामले में ECIR दर्ज कर अपनी फाइल खोल दी है। इस कदम से पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक के गलियारों में खलबली मच गई है।
पैसा लौटाया, पर ‘गुनाह’ नहीं धो पाए साहब!
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प और संदिग्ध भूमिका उन डीएसपी (DSP) रैंक के अधिकारियों की है, जिन्होंने मामला गरमाते देख अपने खातों में आई फर्जी राशि को आनन-फानन में वापस सरकारी खजाने में जमा कर दिया था।
ED का शिकंजा:जांच एजेंसी का मानना है कि पैसा लौटाना ही इस बात का सबूत है कि अधिकारी को ‘अवैध निकासी’ की जानकारी थी।
मनी लॉन्ड्रिंग: अब ED यह खंगाल रही है कि क्या यह केवल एक तकनीकी चूक थी या एक संगठित वित्तीय अपराध (Money Laundering)।
तीन शहर, एक ही मोडस ऑपरेंडी (Modus Operandi)
AG (प्रधान महालेखाकार) चंद्र मौली सिंह की सतर्कता ने इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया। शुरुआती जांच में जो सुराग मिले, उनसे साफ है कि:
1. रांची, हजारीबाग और बोकारो के ट्रेजरी को निशाना बनाया गया।
2. पुलिस विभाग के वेतन मद (Salary Head) से अवैध तरीके से मोटी रकम निकाली गई।
3. SIT अब तक 12 मोहरों को जेल भेज चुकी है, लेकिन असली ‘खिलाड़ी’ अभी भी रडार पर हैं।


















