भारतीय रेलवे अगस्त से बदलेगा 40 साल पुराना रिजर्वेशन सिस्टम, क्लाउड आधारित नया PRS होगा लागू

भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अपने लगभग 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को अब आधुनिक क्लाउड-आधारित तकनीक से बदलने जा रहा है। रेलवे की ओर से अगस्त 2026 से नए सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
नया PRS सिस्टम पूरी तरह क्लाउड टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा, जिससे टिकट बुकिंग प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मौजूदा सिस्टम लंबे समय से इस्तेमाल में है और बढ़ते यात्रियों तथा डिजिटल ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए इसे अपग्रेड करना जरूरी हो गया था।
यात्रियों को क्या होगा फायदा
नए क्लाउड-आधारित सिस्टम के लागू होने के बाद यात्रियों को कई बड़ी सुविधाएं मिलेंगी। इसमें वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर टिकट बुकिंग के दौरान कम समय लगेगा तथा सर्वर डाउन या वेबसाइट स्लो होने जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है। रेलवे का दावा है कि नया सिस्टम एक मिनट में पहले की तुलना में कई गुना अधिक टिकट प्रोसेस करने में सक्षम होगा। त्योहारों और तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान होने वाली भारी भीड़ को संभालने में भी यह तकनीक मददगार साबित होगी।
सुरक्षा और डेटा प्रबंधन होगा मजबूत
रेलवे के अनुसार नया PRS सिस्टम आधुनिक साइबर सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। क्लाउड तकनीक के इस्तेमाल से डेटा बैकअप और रिकवरी की प्रक्रिया भी अधिक सुरक्षित और तेज होगी। इसके अलावा भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस डेटा एनालिटिक्स जैसी सुविधाओं को भी इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा सकेगा, जिससे यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने में मदद मिलेगी।
चरणबद्ध तरीके से होगा लागू
रेलवे सूत्रों के मुताबिक अगस्त 2026 से इस सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। शुरुआत में कुछ जोनों और सेवाओं में इसका परीक्षण किया जाएगा, जिसके बाद पूरे देश में इसे लागू किया जाएगा। भारतीय रेलवे का यह कदम डिजिटल इंडिया और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

















