आजसू के 41वें स्थापना दिवस पर धनबाद में निकलेगा जनाक्रोश मार्च, झारखंड सहित ओडिशा और बंगाल से जुटेंगे कार्यकर्ता

रांची : आजसू पार्टी के 41वें स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को धनबाद में जनाक्रोश मार्च निकाला जाएगा। पार्टी ने इसे झारखंड में कथित भ्रष्टाचार, माफिया राज और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ “उलगुलान की शुरुआत” बताया है। इस कार्यक्रम में झारखंड के अलावा ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में पार्टी के केंद्रीय एवं शीर्ष नेता जनता को संबोधित करेंगे, जिनमें सुदेश महतो, चंद्रप्रकाश चौधरी और विधायक निर्मल महतो शामिल हैं।
प्रेस वार्ता में दी गई जानकारी
रांची स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में झारखंड आंदोलनकारी तथा आजसू के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर और हसन अंसारी ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर केंद्रीय मीडिया संयोजक परवाज खान भी मौजूद थे।
“झारखंड आंदोलन की उपज है आजसू” – प्रवीण प्रभाकर
प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि झारखंड राज्य आजसू के लंबे संघर्ष और आंदोलनकारियों की कुर्बानी का परिणाम है। उन्होंने दावा किया कि 1986 में पार्टी गठन के बाद आंदोलन को नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि 1989 में आजसू की बंदी और आर्थिक नाकेबंदी के बाद केंद्र सरकार को वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप झारखंड विषयक समिति का गठन किया गया। आगे चलकर 1999 में एनडीए के साथ आने के बाद अलग राज्य की प्रक्रिया को गति मिली और अंततः झारखंड राज्य का गठन हुआ।
“सरकार हर मोर्चे पर विफल” – हसन अंसारी
केंद्रीय उपाध्यक्ष हसन अंसारी ने कहा कि शहीद निर्मल महतो ने आजसू की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि कोयलांचल क्षेत्र में अवैध खनन का विरोध करने पर पार्टी नेताओं पर हमले, झूठे मुकदमे और जेल भेजने जैसी घटनाएं हुई हैं। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार “भ्रष्टाचार और माफिया संरक्षण” में लिप्त है।
जनाक्रोश मार्च का उद्देश्य
नेताओं ने कहा कि जनाक्रोश मार्च के माध्यम से सरकार के खिलाफ व्यापक जनआक्रोश को सामने लाया जाएगा और छात्र, युवा, महिला, आदिवासी, दलित, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक वर्गों की समस्याओं को उठाया जाएगा। कार्यक्रम को पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

















