Contingent Crop Plan

लोहरदगा में ‘आकस्मिक फसल योजना’ पर कृषक-वैज्ञानिक कार्यशाला संपन्न: बदलती जलवायु में खेती की नई राह

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आनंद कुमार सोनी / लोहरदगा

दिनांक: 7 जुलाई :  कृषि विज्ञान केंद्र, लोहरदगा में  कृषि विभाग की ‘एग्रीकल्चर एक्सटेंशन योजना’ के अंतर्गत आज कृषि विज्ञान केंद्र, लोहरदगा में “आकस्मिक फसल योजना” विषय पर एक महत्वपूर्ण कृषक-वैज्ञानिक अंतर मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोहरदगा के किसानों को बदलते जलवायु चक्र और एल नीनो (El Niño) के संभावित खतरों से निपटने के लिए वैज्ञानिक तरीके से तैयार करना था।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं

कार्यक्रम में जिला प्रशासन और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों सहित जिले के सभी प्रखंडों के तकनीकी विशेषज्ञों और बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि में अब परंपरा के साथ-साथ तकनीकी नवाचार को जोड़ना अनिवार्य है।

विशेषज्ञों द्वारा दी गई प्रमुख सिफारिशें:

जलवायु-अनुकूल खेती: एल नीनो के कारण संभावित अनिश्चित बारिश को देखते हुए विशेषज्ञों ने खरीफ मौसम में सटीक फसल प्रबंधन और उन्नत बीज उपचार पर जोर दिया।

विविधता अपनाएं: किसानों को एकल खेती के बजाय मिश्रित खेती (Intercropping) अपनाने की सलाह दी गई, जिससे फसल नुकसान का जोखिम कम हो सके।

‘श्री अन्न’ (मिलेट्स) को बढ़ावा: कार्यक्रम का एक बड़ा हिस्सा ‘मिलेट मिशन’ को समर्पित था। वैज्ञानिकों ने रागी (मड़वा), ज्वार, बाजरा, सांवा और कोदो जैसी फसलों को कम पानी में अधिक उत्पादन और उच्च पोषण के लिए बेहतरीन विकल्प बताया।

डिजिटल कीट प्रबंधन: फसलों में किसी भी रोग या कीट के लक्षण दिखने पर, किसान अब सीधे प्रभावित पौधों की फोटो या नमूना वैज्ञानिकों को भेजकर त्वरित और सटीक उपचार प्राप्त कर सकते हैं।

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वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान  किरण सिंह ने कहा, “आधुनिक कृषि का अर्थ केवल फसल उगाना नहीं, बल्कि संसाधनों का सही प्रबंधन करना है। वैज्ञानिक पद्धति से की गई खेती ही किसानों की आय को सुरक्षित और स्थिर बना सकती है।”

कार्यक्रम के अंत में एक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जहाँ वैज्ञानिकों ने किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं का समाधान किया और उन्हें नई तकनीकों को अपने खेतों में आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया।

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