DHANBAD: Path cleared for gangster Fahim Khan's release after 23 years.

23 साल बाद गैंगस्टर फहीम खान की रिहाई का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट का फैसला बरकरार

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DHANBAD: Path cleared for gangster Fahim Khan's release after 23 years.

धनबाद। झारखंड के चर्चित वासेपुर हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर फहीम खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने झारखंड सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट के रिहाई संबंधी आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फहीम खान की जेल से रिहाई का कानूनी रास्ता लगभग पूरी तरह साफ हो गया है। अब जेल प्रशासन को अदालत के निर्देशों के अनुरूप रिहाई की औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

यह मामला केवल एक कैदी की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि आजीवन कारावास की सजा पाने वाले कैदियों पर लागू रिमिशन (सजा में छूट) नीति की व्याख्या को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि किसी दोषी की रिहाई पर विचार उसी रिमिशन नीति के अनुसार किया जाना चाहिए, जो उसके दोषसिद्ध होने के समय लागू थी।

1989 के हत्याकांड से जुड़ा है मामला

फहीम खान का मामला वर्ष 1989 में धनबाद के वासेपुर में हुए सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड से जुड़ा है। इस मामले की सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने 15 जून 1991 को फहीम खान को दोषी करार दिया था। बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2009 में उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 21 अप्रैल 2011 को भी शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को सही मानते हुए उम्रकैद की सजा कायम रखी।

इसके बाद फहीम खान लगातार जेल में बंद रहे। समय के साथ उनकी उम्र बढ़ने, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और जेल में लंबी अवधि बिताने के आधार पर उनकी रिहाई का प्रश्न उठा।

रिमिशन नीति बनी विवाद का कारण

फहीम खान की रिहाई पर विचार करते समय राज्य सरकार के समीक्षा बोर्ड ने वर्ष 2007 की संशोधित रिमिशन नीति को आधार बनाया और उनकी रिहाई से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ फहीम खान ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

झारखंड हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को अपने फैसले में कहा कि समीक्षा बोर्ड ने गलत नीति लागू की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि फहीम खान को 15 जून 1991 को दोषी ठहराया गया था, इसलिए उनके मामले में उस समय प्रभावी 1984 की रिमिशन नीति लागू होगी, न कि वर्ष 2007 की संशोधित नीति।

हाईकोर्ट ने सरकार को छह सप्ताह के भीतर फहीम खान की रिहाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

आदेश का पालन नहीं होने पर दायर हुई अवमानना याचिका

हाईकोर्ट द्वारा तय समय सीमा समाप्त होने के बावजूद सरकार ने फहीम खान की रिहाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने अदालत में अवमानना याचिका दायर की। इसी दौरान झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील की खारिज

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार और फहीम खान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद झारखंड सरकार की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।

इसके साथ ही हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहा और फहीम खान की रिहाई का रास्ता साफ हो गया। अब जेल प्रशासन को रिहाई संबंधी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

फैसले का व्यापक कानूनी महत्व

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे कई मामलों के लिए मिसाल साबित हो सकता है, जिनमें दोषियों की रिहाई पर यह विवाद रहा है कि उनके मामले में पुरानी रिमिशन नीति लागू होगी या बाद में बनाई गई संशोधित नीति।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह सिद्धांत और मजबूत हुआ है कि दोषी के अधिकारों का मूल्यांकन उसी कानून और नीति के अनुसार किया जाएगा, जो उसके दोषसिद्ध होने के समय प्रभावी थी। बाद में बनाई गई कठोर नीतियों को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से जुड़ा रहा नाम

फहीम खान का नाम लोकप्रिय हिंदी फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ के कारण भी लंबे समय से चर्चा में रहा है। अनुराग कश्यप निर्देशित इस फिल्म में धनबाद और वासेपुर क्षेत्र के लंबे समय तक चले गैंगवार, कोयला कारोबार और आपराधिक संघर्षों को सिनेमाई रूप में दिखाया गया था। हालांकि फिल्म वास्तविक घटनाओं से प्रेरित थी और इसे पूरी तरह किसी एक व्यक्ति की जीवनी नहीं माना जाता, लेकिन फहीम खान का नाम इस फिल्म के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।

सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार की अपील खारिज होने के बाद अब फहीम खान की रिहाई में सबसे बड़ा कानूनी अवरोध समाप्त हो गया है। यदि जेल प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप सभी औपचारिकताएं पूरी करता है, तो करीब 23 वर्षों से जेल में बंद फहीम खान जल्द ही रिहा हो सकते हैं।

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