13 साल से नाम बदलकर छत्तीसगढ़ में छिपा था वासेपुर का गैंगस्टर, पुलिस पहुंची तो साथियों ने दिलाई फरारी; मददगारों पर भी FIR

धनबाद: वासेपुर से जुड़े चर्चित आपराधिक मामलों में झारखंड पुलिस ने फरार गैंगस्टरों के खिलाफ शिकंजा कसना तेज कर दिया है। पुलिस ने वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम और उसके सहयोगियों की तलाश में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर तक दबिश दी। हालांकि कार्रवाई के दौरान आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। अब पुलिस ने उसे भगाने में मदद करने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में चमकी झारखंड की प्रतिभा, ‘आंगेन’ के निर्देशक रवि राज मुर्मू को मुख्यमंत्री ने दी बधाई
रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संथाली फिल्म ‘आंगेन’ (Angen) के निर्देशक रवि राज मुर्मू को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘सर्वश्रेष्ठ नवोदित…

मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना से बदल रही महिलाओं की जिंदगी, कोडरमा में बढ़ रहा स्वरोजगार
कोडरमा: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना कोडरमा जिले की महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभरी…

‘हैंड ऑफ गॉड’ से ‘मेस्सी मैजिक’ तक… आखिर क्यों अर्जेंटीना के लिए चमत्कारी साबित होते हैं उसके नंबर-10?
नवीन कुमार फुटबॉल में कुछ खिलाड़ी सिर्फ गोल नहीं करते, बल्कि इतिहास लिखते हैं। अर्जेंटीना के लिए यह इतिहास पहले डिएगो माराडोना…
जानकारी के अनुसार, झारखंड पुलिस ने अंबिकापुर कोतवाली थाना में शिकायत दर्ज कराते हुए उन लोगों के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू कराई है, जिन्होंने पुलिस कार्रवाई में बाधा डालते हुए आरोपी को फरार होने का मौका दिया।

13 साल तक बदली पहचान के साथ रहा
जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पुलिस के अनुसार, शाकिब अफजल, जो पिछले करीब 13 वर्षों से फरार था, अंबिकापुर में पहचान बदलकर रह रहा था। उसके खिलाफ 2004 में धनबाद के डॉन फहीम खान के कार्यालय पर AK-47 और पिस्टलों से हुए हमले के मामले में नामजद प्राथमिकी दर्ज है।
पुलिस का दावा है कि फरारी के दौरान उसने अंबिकापुर में जमीन समेत अन्य कारोबार खड़े कर लिए और सामान्य नागरिक की तरह जीवन बिताता रहा।
घर कुर्क होने के बाद पहुंचे थे छत्तीसगढ़
पुलिस जांच के मुताबिक, वासेपुर में संपत्ति कुर्क होने के बाद शाकिब अफजल और शब्बीर आलम ने अपना हुलिया और पहचान बदल ली थी। दोनों अंबिकापुर में लंबे समय से रह रहे थे।
हाल ही में धनबाद पुलिस जब शब्बीर आलम को पकड़ने पहुंची, तभी उसका बेटा और कुछ सहयोगी मौके पर पहुंच गए। पुलिस से बहस और हंगामे के बीच शब्बीर आलम तथा उसका सहयोगी जावेद वहां से फरार हो गए।
2004 के AK-47 हमले का आरोपी
30 जनवरी 2004 की रात धनबाद के वासेपुर स्थित फहीम खान के आवासीय कार्यालय पर AK-47 और अन्य हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी। इस हमले में फहीम खान के बॉडीगार्ड विनोद की मौत हो गई थी, जबकि उनके भाई सिराज समेत अन्य लोग घायल हुए थे।
इस मामले में शाकिब अफजल का नाम सामने आया था। जांच में शब्बीर आलम और उसके भाइयों पर जेल से साजिश रचकर हमला कराने के आरोप भी लगे थे।
फहीम खान की मां और मौसी की हत्या का भी आरोपी
वासेपुर के चर्चित आपराधिक इतिहास में साबिर आलम का नाम भी प्रमुख आरोपियों में शामिल है। उस पर वर्ष 2001 में फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून की दिनदहाड़े हत्या कराने का आरोप है।
डायमंड क्रॉसिंग के पास हुई इस दोहरे हत्याकांड से पूरे वासेपुर में दहशत फैल गई थी। इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। साबिर आलम बाद में अदालत में सरेंडर कर चुका था, वर्ष 2013 में उसे जमानत मिली और उसके बाद से वह फिर फरार बताया जाता है। धनबाद पुलिस उसे भगोड़ा घोषित कर चुकी है।
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से जुड़ती है घटना
2004 में फहीम खान के कार्यालय पर हुए AK-47 हमले को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है कि इसी तरह की घटना से प्रेरित दृश्य बॉलीवुड फिल्म “गैंग्स ऑफ वासेपुर” की शुरुआती कहानी में भी दिखाई देता है। हालांकि फिल्म एक काल्पनिक कृति है और उसके पात्र व घटनाएं सीधे तौर पर किसी एक वास्तविक मामले का आधिकारिक चित्रण नहीं हैं।
पुलिस का बयान
धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने कहा कि शब्बीर आलम की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस के अनुसार, वासेपुर से जुड़े कई मामलों के कुछ आरोपी अब भी फरार हैं। जांच को प्रभावित करने और आरोपियों को फरार कराने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।रांची में बिछेगा 10 फ्लाईओवर का जाल ! शहरवासियों के लिए बड़ी खबर

















