Success story : JEE में टॉप रैंक, पहली कोशिश में IAS और फिर इस्तीफा… क्यों चुना संगीत का रास्ता?

Success story : आमतौर पर IIT और IAS जैसी उपलब्धियों को सफलता की अंतिम सीढ़ी माना जाता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके लिए असली सफलता वही होती है, जिसमें उनका मन बसता है। कशिश मित्तल का सफर इसी सोच की मिसाल माना जा रहा है।

पढ़ाई के क्षेत्र में उन्होंने कम उम्र में ऐसी उपलब्धियां हासिल कीं, जिनका सपना लाखों छात्र देखते हैं। JEE में ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल करने के बाद उन्होंने IIT दिल्ली से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की। इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 58 के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चयनित हो गए।
प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। अलग-अलग पदों पर काम करते हुए भी उनकी एक आदत कभी नहीं बदली—शास्त्रीय संगीत का नियमित अभ्यास। बचपन से संगीत उनके जीवन का हिस्सा था और समय के साथ यही लगाव उनकी सबसे बड़ी पहचान बनता गया।
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करीब नौ साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जिसने सभी को चौंका दिया। उन्होंने IAS की नौकरी छोड़ दी। कई तरह की चर्चाएं हुईं, लेकिन उन्होंने साफ किया कि उनका उद्देश्य केवल संगीत को पूरा समय देना था। उनका मानना था कि शास्त्रीय संगीत केवल शौक नहीं, बल्कि पूरी साधना मांगता है।
IAS छोड़ने के बाद उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में भी नई शुरुआत की और माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च से जुड़े। यहां भी उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं रहा। मार्च 2025 में उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्टार्टअप Disha AI की स्थापना की। इस पहल का उद्देश्य तकनीक की मदद से बेहतर शिक्षा को अधिक लोगों तक पहुंचाना बताया जाता है।
हाल के समय में उनकी एक संगीत प्रस्तुति सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद उनका करियर सफर फिर चर्चा में आ गया। IIT, IAS, कॉर्पोरेट और स्टार्टअप के साथ संगीत को समान महत्व देने वाली उनकी यात्रा को लोग अलग नजरिए से देख रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच भी इस कहानी की खूब चर्चा है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि यह सफर बताता है कि किसी परीक्षा में सफलता जीवन की अंतिम मंजिल नहीं होती। इंसान को अंततः वही रास्ता चुनना चाहिए, जहां उसे सुकून और संतुष्टि मिले।
कशिश मित्तल की कहानी यह संदेश देती है कि करियर में बड़ी उपलब्धियां महत्वपूर्ण जरूर हैं, लेकिन अगर वे आपकी असली रुचि और उद्देश्य से मेल नहीं खातीं, तो जीवन में अधूरापन बना रह सकता है। कभी-कभी सबसे कठिन फैसला वही होता है, जो आपको अपने मन की आवाज सुनने का साहस देता है।

















