Priti Kujur from Simdega, who was stranded in Oman, has returned safely thanks to the initiative of Chief Minister Hemant Soren.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल से ओमान में फंसी सिमडेगा की प्रीति कुजूर सकुशल लौटीं, प्रशासन और भारतीय दूतावास के प्रयास रहे सफल

रांची: विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी का शिकार हुई झारखंड के सिमडेगा जिले की रहने वाली प्रीति कुजूर अब सुरक्षित अपने घर लौट आई हैं। ओमान में फंसी प्रीति की वापसी मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के हस्तक्षेप के बाद संभव हो सकी। राज्य सरकार के श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग तथा भारतीय दूतावास, मस्कट के समन्वित प्रयासों से उनकी स्वदेश वापसी की सभी औपचारिकताएं पूरी कराई गईं। प्रीति 1 अगस्त को भारत के लिए रवाना हुईं और 2 अगस्त को झारखंड पहुंच गईं।

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सोशल मीडिया के जरिए सामने आया मामला

प्रीति की परेशानी सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने बिना देर किए पूरी प्रक्रिया शुरू की। 23 जून को मामले की जानकारी रांची स्थित प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स (POE) और भारतीय दूतावास, मस्कट को भेजी गई। अगले ही दिन दूतावास ने प्रीति से संपर्क स्थापित कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

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रोजगार का झांसा, पहुंचा दिया ओमान

सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड के मरारोमा गंझूटोली गांव की रहने वाली प्रीति को मार्च 2026 में एक एजेंट ने दुबई में अच्छी नौकरी और 45 से 50 हजार रुपये मासिक वेतन का भरोसा दिलाया था। लेकिन वहां भेजने के बजाय उन्हें ओमान पहुंचा दिया गया, जहां कम वेतन पर काम कराया गया। उन्हें हर महीने केवल 23 से 25 हजार रुपये दिए जा रहे थे।

जब उन्होंने वापस लौटने की इच्छा जताई तो कंपनी ने अनुबंध का हवाला देकर उन्हें रोक लिया और रिहाई के बदले बड़ी रकम की मांग कर दी। परिवार ने करीब 1.92 लाख रुपये भी जमा किए, लेकिन इसके बावजूद उनकी वापसी नहीं हो सकी।

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लगातार बातचीत के बाद निकला समाधान

कंपनी की ओर से पहले 950 ओमानी रियाल जमा करने की शर्त रखी गई थी। राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने भारतीय दूतावास के माध्यम से कंपनी प्रबंधन से कई दौर की बातचीत की और प्रीति की आर्थिक स्थिति से अवगत कराया। बातचीत का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि मांगी गई राशि घटाकर 600 ओमानी रियाल कर दी गई।

राशि जमा होने के बाद कंपनी ने प्रीति का पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज वापस कर दिए, जिससे उनके भारत लौटने का रास्ता साफ हो गया।

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प्रवासी श्रमिकों के लिए सरकार की सक्रियता

इस पूरे मामले में राज्य सरकार, श्रम विभाग और भारतीय दूतावास के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। अधिकारियों का कहना है कि विदेशों में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना कर रहे झारखंड के प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए सरकार लगातार सक्रिय है। प्रीति कुजूर की सुरक्षित वापसी इसी प्रयास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है।

 

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