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धनबाद : छाताबाद में भू-धंसान से उजड़े लोगों की फिर फरियाद, ग्रामीण चिल्लाते रहे- ‘घर बचा लीजिए साहब’; बैठक के बाद भी मिला सिर्फ आश्वासन

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धनबाद/बाघमारा। छाताबाद में जमीन धंस रही है, घरों की दीवारों में दरारें पड़ रही हैं और लोगों के सिर पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। इसी डर और उम्मीद के साथ गुरुवार को छाताबाद के सैकड़ों प्रभावित ग्रामीण बाघमारा सभागार पहुंचे। उम्मीद थी कि प्रशासन और बीसीसीएल के अधिकारी उनकी जिंदगी से जुड़े इस संकट का कोई ठोस रास्ता निकालेंगे। लेकिन घंटों चली मैराथन बैठक के बाद भी ग्रामीणों के हाथ आश्वासन के अलावा कुछ ठोस नहीं लगा।

बैठक में ग्रामीण अपनी परेशानी बताते रहे। कोई प्रभावित इलाके में मिट्टी भराई की मांग कर रहा था, तो कोई अवैध खनन तत्काल बंद कराने की गुहार लगा रहा था। कई ग्रामीणों की एक ही फरियाद थी—‘अगर हमारा इलाका रहने लायक नहीं है तो हमें कहीं दूर मत भेजिए, आसपास ही बसा दीजिए।’

ग्रामीणों का कहना था कि उनका घर ही नहीं, बल्कि उनकी रोजी-रोटी भी इसी इलाके से जुड़ी है। उन्हें अगर बहुत दूर भेज दिया गया तो परिवार का रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी सब प्रभावित हो जाएगी।

 

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ग्रामीणों की गुहार के सामने फिर वही इंतजार

बैठक के दौरान ग्रामीणों और बीसीसीएल अधिकारियों के बीच कई बार नोकझोंक की स्थिति भी बनी। भू-धंसान से परेशान लोग अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग करते रहे।

ग्रामीणों का सवाल था कि जब जमीन धंस रही है और घरों में दरारें आ रही हैं तो सिर्फ जांच रिपोर्ट का इंतजार कब तक किया जाएगा?

लेकिन बीसीसीएल की ओर से तत्काल स्थायी समाधान के बजाय IIT-ISM की जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कही गई।

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बीसीसीएल GM बोले- पूरा कोल बेयरिंग एरिया रहने लायक नहीं

बीसीसीएल एरिया-3 के महाप्रबंधक ने बैठक में कहा कि समस्या केवल छाताबाद तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार पूरा कोल बेयरिंग एरिया ही रहने के लिहाज से सुरक्षित नहीं है।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र की जांच IIT-ISM को सौंपी गई है। 15 से 20 दिनों में रिपोर्ट आने की उम्मीद है। रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल उन्होंने प्रभावित लोगों से सुरक्षित स्थान पर चले जाने की अपील की। उनका कहना था कि जान की सुरक्षा सबसे जरूरी है।

‘घर छोड़कर राहत कैंप में चले जाइए’

बीसीसीएल की ओर से बताया गया कि प्रभावित लोगों के लिए अटल क्लिनिक में राहत कैंप बनाया गया है, जहां रहने और खाने की व्यवस्था की गई है।

लेकिन ग्रामीणों की परेशानी यह है कि राहत कैंप में जाना उनके लिए स्थायी समाधान नहीं है। उनका सवाल है कि कुछ दिनों के लिए कैंप में रहने के बाद वे जाएंगे कहां?

एक तरफ घर असुरक्षित बताए जा रहे हैं और दूसरी तरफ स्थायी पुनर्वास की तस्वीर अभी साफ नहीं है। यही वजह है कि बैठक में ग्रामीण बार-बार तत्काल समाधान की मांग करते रहे।

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बीसीसीएल ने अवैध खनन को माना भू-धंसान का अहम कारण

बैठक में बीसीसीएल महाप्रबंधक ने यह भी माना कि क्षेत्र में हो रहा अवैध खनन भू-धंसान का एक अहम कारण है। बीसीसीएल की ओर से कहा गया कि अवैध खनन रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रामीणों की मांग है कि अगर अवैध खनन भू-धंसान की बड़ी वजह है तो इसे रोकने के लिए भी तत्काल और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

बेलगड़िया भेजने की बात, ग्रामीणों की मांग- आसपास ही बसाइए

पुनर्वास के सवाल पर बीसीसीएल की ओर से JRDA के तहत बेलगड़िया में बसाने की योजना की जानकारी दी गई।

लेकिन ग्रामीण दूर जाने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि बेलगड़िया भेजने से उनका रोजगार छिन सकता है। इसलिए यदि पुनर्वास जरूरी है तो छाताबाद या उसके आसपास ही सुरक्षित जमीन देकर बसाया जाए।

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शुक्रवार को होगा सर्वे

बीसीसीएल की ओर से बताया गया कि शुक्रवार को एक टीम प्रभावित क्षेत्र का सर्वे करेगी। इसके बाद स्थिति का आकलन किया जाएगा।

वहीं बाघमारा CO ने कहा कि जिला प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद दी जाएगी। प्रशासन की ओर से सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई।

सवाल वही- आखिर कब मिलेगा स्थायी समाधान?

बैठक खत्म हो गई, अधिकारी लौट गए और ग्रामीण फिर अपने सवालों के साथ रह गए।

घर में दरार है। जमीन धंस रही है। रहने का डर है। रोजगार छोड़ने का डर है। और भविष्य को लेकर अनिश्चितता है।

ग्रामीणों की फरियाद भी वही है—‘हमारा घर बचा लीजिए, नहीं तो हमें अपने आसपास सुरक्षित जगह पर बसा दीजिए।’

लेकिन फिलहाल जवाब फिर वही है—जांच होगी, सर्वे होगा, रिपोर्ट आएगी और उसके बाद फैसला होगा।

यानी छाताबाद के प्रभावित परिवारों के लिए वही पुरानी कहानी—गुहार, बैठक, आश्वासन और फिर इंतजार।

अब ग्रामीणों की नजर IIT-ISM की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी है। सवाल सिर्फ इतना है कि जब तक रिपोर्ट आएगी, तब तक इन परिवारों की जिंदगी कितनी सुरक्षित रहेगी?

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गोविंद मोदक

गोविंद मोदक

रिपोर्टर

पत्रकार | न्यूज़ रिपोर्टर | मीडिया प्रोफेशनल गोविंद मोदक धनबाद, झारखंड के पत्रकार हैं और उन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में लगभग 6 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने अपराध, राजनीति, सामाजिक एवं नागरिक मुद्दों, जनसरोकार और जमीनी स्थानीय खबरों पर रिपोर्टिंग की है। उन्होंने Newz India 24, TV45 Satellite Channel, DHN24, Vande Bharat News, Chanakya News India Jharkhand और Bharatmitra News जैसे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ कार्य किया है। उनकी पत्रकारिता तथ्यपरक, जिम्मेदार और जमीनी रिपोर्टिंग पर केंद्रित है, जिसमें आम लोगों के मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाना शामिल है। मुख्य विशेषज्ञता: अपराध एवं राजनीतिक रिपोर्टिंग • जमीनी पत्रकारिता • सामाजिक एवं नागरिक मुद्दे • जनसरोकार • प्रभावी संवाद एवं नेटवर्किंग